पेरिस। बांग्लादेश में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पुण्यतिथि पर निजी प्रार्थना और स्मृति सभा में शामिल हुए 15 वकीलों को गिरफ्तार कर लिया गया। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने इन गिरफ्तारियों को मनमाना बताते हुए बांग्लादेशी अधिकारियों की आलोचना की है।

गिरफ्तार किए गए वकीलों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। ये सभी चटगांव जिला बार एसोसिएशन से जुड़े बताए गए। बाद में 5 महिला वकीलों को कोर्ट ने रविवार दोपहर जमानत दे दी जबकि 10 को बेल नहीं दी गई।

बांग्लादेशी दैनिक प्रथोम आलो के अनुसार, पुलिस ने शनिवार रात चटगांव के डबल मूरिंग इलाके में एक घर से इन वकीलों को हिरासत में लिया। स्थानीय पुलिस स्टेशन के ओसी शाहीन आलम ने बताया कि ये वकील अवामी लीग के समर्थक और कार्यकर्ता हैं और इन्हें आतंक विरोधी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।

ये सभी 15 अगस्त को बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पुण्यतिथि मनाने के लिए एकत्र हुए थे।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण निजी प्रार्थना और स्मृति सभा में भाग लेने के लिए वकीलों पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत कार्रवाई करना गंभीर चिंता का विषय है। संगठन ने अधिकारियों से गिरफ्तार किए गए वकीलों के अधिकारों का सम्मान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की मांग की है।

बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की पुण्यतिथि को लेकर इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक तनाव के बीच कई घटनाएं सामने आई हैं। 15 अगस्त को ढाका में भी मुजीबुर रहमान के चित्र पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में उसके खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

शेख मुजीबुर रहमान की 15 अगस्त 1975 को उनके परिवार के कई सदस्यों के साथ हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 15 अगस्त बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक बेहद संवेदनशील तारीख बन गया।

एक शांतिपूर्ण और निजी स्मृति सभा पर "आतंक विरोधी" कानून का इस्तेमाल खतरनाक है। जेएमबीएफ ने कहा, “वकीलों को हिंसा या आतंकवादी गतिविधि से संबंधित सबूत की कमी के बावजूद मनमानी गिरफ्तारी, सही प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और संगठन बनाने, राजनीतिक भागीदारी, और आतंकवाद विरोधी कानून के संभावित गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।”

संगठन के संस्थापक अध्यक्ष और मानवाधिकार वकील शाहनूर इस्लाम ने कहा, " चटगांव में 15 वकीलों की गिरफ्तारी कोई पहला मामला नहीं है। ये बांग्लादेश में राजनीतिक गतिविधियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के बेजा इस्तेमाल का एक पैटर्न है। पिछली अंतरिम सरकार के दौरान ये चरम पर था लेकिन वर्तमान सत्ता भी इसे रोक नहीं पाई है।"

जेएमबीएफ ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय यूनियन, बांग्लादेश स्थित मिशनों, अंतरराष्ट्रीय बार एसोसिएशन समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठनों से ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की अपील की। कहा कि हर नागरिक को आजादी और सम्मान से जीने का अधिकार है। हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय वकीलों के इन मूलभूत अधिकारों को बनाए रखने में योगदान दे।