ग्वालियर। ग्वालियर के चिरवाई नाका इलाके में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जहां पहाड़ी पर बनी लगभग 15 फीट ऊंची कंक्रीट की रिटेनिंग वॉल अचानक भरभराकर ढह गई। सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच हुए इस हादसे के वक्त दीवार के पास ही एक परिवार चाय का ठेला लगा रहा था, जो पूरी तरह मलबे की चपेट में आ गया। इस घटना में ठेला लगाने वाली महिला की मलबे में दबने और इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई, जबकि उसके पति और देवर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। हादसे में जान गंवाने वाली 40 वर्षीय महिला की पहचान तराना के रूप में हुई है, जिसने प्रेम विवाह करने के बाद अपना नाम बदलकर सपना रख लिया था। वह अपने पति राहुल उर्फ लल्ली जाटव और देवर पप्पू जाटव के साथ सुबह दुकान पर मौजूद थी। यह परिवार मूल रूप से गोल पहाड़िया संजय नगर का रहने वाला था और वर्तमान में किराए के मकान में रहकर चाय के ठेले से अपना जीवनयापन कर रहा था। हादसे के वक्त पप्पू कुछ दिन पहले ही अपने भाई-भाभी से मिलने आया हुआ था। तीनों को मलबे से निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला ने दम तोड़ दिया।
दीवार निर्माण में बड़ी लापरवाही और सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों ने नगर निगम द्वारा बनाई जा रही इस दीवार के निर्माण कार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि दीवार की ऊंचाई जरूरत से ज्यादा रखी गई थी और इसके निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें मजबूती के लिए पर्याप्त मात्रा में लोहे के सरिए भी नहीं डाले गए थे। इस दीवार का निर्माण कार्य करीब दो महीने पहले ही शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए एक विशेष तकनीकी दल गठित करने की बात कही है। दूसरी ओर, हादसे के पीछे एक तात्कालिक कारण दीवार पर पड़ा अत्यधिक दबाव भी माना जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, जिस कंक्रीट की दीवार के पास यह हादसा हुआ, उसके ठीक पीछे एक अन्य मकान का निर्माण कार्य भी चल रहा था। इस निर्माण कार्य से जुड़ी भारी सामग्री, जैसे रेत और कंक्रीट, को दीवार के ठीक पीछे डंप किया गया था। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस अतिरिक्त वजन और दबाव के कारण ही दीवार का ढांचा कमजोर हुआ और वह आगे की तरफ गिर गई। हालांकि, वास्तविक कारणों का खुलासा पूरी जांच के बाद ही हो सकेगा।
बड़े पैमाने पर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन और घायलों को त्वरित सहायता
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू अभियान को तेज किया। मलबे के नीचे किसी अन्य राहगीर या मजदूर के फंसे होने की आशंका को पूरी तरह दूर करने के लिए मौके पर 5 जेसीबी और 2 हाइड्रोलिक क्रेन बुलाई गईं, जिनकी मदद से कंक्रीट के भारी-भरकम हिस्सों को हटाकर सघन चेकिंग की गई। हादसे के बाद एसडीएम सीबी प्रसाद ने बताया कि मलबे से निकाले गए दोनों पुरुषों को तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से राहुल के पैर में गंभीर फ्रैक्चर होने के कारण डॉक्टरों ने प्लास्टर चढ़ा दिया है, जबकि उसके भाई पप्पू की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। आंतरिक चोटों का पता लगाने के लिए दोनों का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए बताया कि मृतका के आश्रितों को तत्काल राहत के रूप में रेडक्रॉस सोसाइटी के माध्यम से 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत कर दी गई है। कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट में निर्माण कार्य से जुड़ी जो भी एजेंसी, ठेकेदार या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के दायरे में सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।




