नागोया। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों के तीन गोल्ड समेत 6 मेडल जीतने के बाद बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के प्रेसिडेंट अजय सिंह ने पिछले दशक में भारतीय बॉक्सिंग की लगातार तरक्की की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले भारत वर्ल्ड बॉक्सिंग में 44वें नंबर पर था और अब टॉप पर है।भारत ने 3 गोल्ड और 3 ब्रॉन्ज समेत कुल छह मेडल जीते, जो एशियन गेम्स में भारत का अब तक का सबसे सफल अभियान रहा। एशियन गेम्स 2010 में भारत ने 2 गोल्ड मेडल जीते थे। भारत ने छह मेडल - तीन गोल्ड और तीन ब्रॉन्ज़ - जीते, जो एशियाई खेलों में बॉक्सिंग में जीते गए टाइटल्स के मामले में उनका सबसे सफल कैंपेन रहा। ग्वांगझू 2010 में भारत ने दो गोल्ड जीते थे। इस बार लवलीना बोरगोहेन ने भी इतिहास रचा। उन्होंने हांगझू 2023 में जीते अपने सिल्वर मेडल को गोल्ड में तब्दील किया। इसके साथ ही वह एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बन गईं। मैरी कॉम ने यह उपलब्धि एशियन गेम्स 2014 में हासिल की थी।

अजय सिंह ने 'आईएएनएस' के साथ बात करते हुए कहा, "यह बहुत गर्व की बात है। भारत एशियन गेम्स में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और चीन से आगे रहा , जिन्हें बॉक्सिंग में लीडिंग देश माना जाता है। टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। यह बहुत गर्व की बात है।" ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन दमदार रहा था और उन्होंने अपने अभियान का अंत 10 मेडल के साथ किया था, जिसमें रिकॉर्ड 7 गोल्ड मेडल शामिल रहे थे। किसी भी देश ने कॉमनवेल्थ गेम्स के एक ही संस्करण में बॉक्सिंग में इससे ज्यादा गोल्ड मेडल नहीं जीते हैं।

बॉक्सिंग टीम के राजधानी पहुंचने के बाद अजय सिंह ने ​​कहा, "सिर्फ एशियन गेम्स में ही नहीं, भारत कॉमनवेल्थ गेम्स में भी पहले नंबर पर रहा। उससे पहले, हम एशियाई चैंपियनशिप में दूसरे और वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीसरे नंबर पर रहे थे।" बीएफआई के सिलेक्शन क्राइटेरिया के तहत, एशियन गेम्स में मेडल जीतने वालों को वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2027 के लिए उनकी संबंधित वेट कैटेगरी में मेन एंट्री के तौर पर चुना जाएगा। कजाकिस्तान में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए बॉक्सिंग का पहला क्वालिफाइंग इवेंट होगा। लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भारत की संभावनाओं और तैयारियों के बारे में बात करते हुए बीएफआई प्रमुख ने कहा कि पूरी टीम मुक्केबाजों की कमजोरियों पर काम करेगी, ताकि उन्हें 2028 समर गेम्स में मेडल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार किया जा सके।

उन्होंने कहा, "भारत ने लगातार बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। हमें लगता है कि अगर हम इसी तरह तैयारी करते रहे, तो हम निश्चित रूप से ओलंपिक में मेडल जीतेंगे। लगातार तैयारी चल रही है। 10 साल पहले, जब मैं बीएफआई का अध्यक्ष बना था, तब हम दुनिया में 44वें स्थान पर थे। आज, हम दुनिया में सबसे आगे हैं। इसी तरह तैयारी जारी रहेगी। हमें जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास नहीं रखना चाहिए। हमें अपनी कमजोरियों पर काम करने की कोशिश करनी चाहिए।" एशियन गेम्स 2026 में लवलीना (75 किग्रा), परवीन हुड्डा (65 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि कपिल पोखरिया (90 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) और प्रिया घांघस (60 किग्रा) ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।

बीएफआई प्रमुख ने यह भी कहा कि इस बार भारतीय मुक्केबाजों ने हैवीवेट कैटेगरी में भी मेडल जीते हैं, जिससे आम लोगों की यह सोच गलत साबित हुई है कि देश केवल लाइट वेट कैटेगरी में ही मेडल जीतता है। उन्होंने कहा, "पहले कहा जाता था कि भारत केवल लाइट वेट कैटेगरी में अच्छा प्रदर्शन करता है, हैवीवेट में नहीं। इस बार हमने हैवीवेट कैटेगरी में कई मेडल जीते हैं। अंकुश ने 80 किग्रा में मेडल जीता है, नरेंद्र ने 90 किग्रा में मेडल जीता है और कपिल ने भी मेडल जीता है। तो, यह बहुत अच्छा रहा। लवलीना ने भी महिलाओं के सर्वाधिक भारवर्ग में मेडल जीता है। इसी कारण हम बहुत खुश हैं और हमें लगता है कि हमें इसी तरह तैयारी जारी रखनी चाहिए।"