विश्व कैंसर दिवस विशेष: बुंदेलखंड के एक महिला चिकित्सक ने बदल डाली हजारों जिंदगियां

Advertisement
आज 4 फरवरी को पूरा विश्व 'कैंसर दिवस' मना रहा है, लेकिन बुंदेलखंड के छतरपुर, महोबा और टीकमगढ़ जैसे क्षेत्रों के लिए यह दिन केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि एक जीवनदायी अभियान की सफलता का उत्सव है। पिछले एक दशक के समर्पण और विशेषकर बीते तीन वर्षों के सघन प्रयासों से डॉ. श्वेता गर्ग ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। उनके द्वारा संचालित निःशुल्क कैंसर जागरूकता एवं जांच शिविरों ने सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो संसाधनों की कमी और सामाजिक रूढ़ियों के बावजूद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात दी जा सकती है।
डॉ. श्वेता गर्ग के इस अभियान की सबसे बड़ी मजबूती इसका जमीनी स्तर पर जुड़ाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कैंसर को लेकर व्याप्त अज्ञानता, झिझक और इलाज के डर को दूर करना एक बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए डॉ. श्वेता और उनकी टीम ने छतरपुर, महोबा और टीकमगढ़ के 320 से अधिक गांवों तक अपनी पहुंच बनाई। इन शिविरों में न केवल महिलाओं और पुरुषों की नियमित जांच की गई, बल्कि उन्हें कैंसर के विभिन्न प्रकारों, लक्षणों और बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक किया गया। टीम ने सही समय पर मरीजों की पहचान कर उन्हें उच्च केंद्रों पर रेफर किया और निःशुल्क परामर्श के माध्यम से उनका उचित मार्गदर्शन सुनिश्चित किया।
इस सेवा यात्रा के आंकड़े डॉ. श्वेता गर्ग की निष्ठा की कहानी खुद बयां करते हैं। अब तक इस अभियान के अंतर्गत 1,50,000 से अधिक ग्रामीण नागरिकों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 6,000 से अधिक कैंसर मामलों की समय पर पहचान करना संभव हो सका है। समय पर डायग्नोसिस होने के कारण लगभग 2,500 मरीजों का सफल इलाज हो सका, जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक तबाही से बचाया गया। विशेष रूप से महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर की जांच को लेकर आई जागरूकता और पुरुषों में तंबाकू व गुटखा छोड़ने के प्रति बढ़ती रुचि इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
डॉ. श्वेता गर्ग के अनुसार, कैंसर के खिलाफ जंग में 'प्रारंभिक जांच' ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। उनका मानना है कि शुरुआती अवस्था में पकड़ी गई बीमारी को न केवल नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि मरीज को पूर्णतः स्वस्थ भी किया जा सकता है। आधुनिकता के साथ कदम मिलाते हुए इस अभियान को अब 'कैंसर अवेयरनेस ऐप' का भी साथ मिला है, जिसके माध्यम से डिजिटल रूप में सही जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा रही है। आज बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए डॉ. श्वेता गर्ग की यह पहल केवल एक चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बन चुकी है।
