श्योपुर,उत्तम सिंह। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 15 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू करने के दावे जिले में पूरी तरह खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि श्योपुर जिले के कई खरीदी केंद्रों पर अब तक समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ नहीं हो सकी है। इससे नाराज किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जिले के सलमान्या साइलो केंद्र का हाल सबसे ज्यादा चिंताजनक बना हुआ है, जहां सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कई दिनों से डटे हुए हैं। किसानों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं, लेकिन खरीदी की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे बैठे किसान और उनके परिवारजन प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
खरीदी शुरू न होने से बढ़ी परेशानी
किसानों का कहना है कि सरकार ने 15 अप्रैल से खरीदी शुरू करने का दावा किया था, लेकिन मौके पर न तो पर्याप्त स्टाफ मौजूद है और न ही खरीदी की कोई व्यवस्था दिखाई दे रही है। कई किसानों ने बताया कि वे पिछले दो-तीन दिनों से अपनी फसल लेकर केंद्र पर बैठे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे उनकी फसल खराब होने का भी खतरा बढ़ गया है।
किसान नेता ने किया प्रदर्शन
किसानों की सूचना पर किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला बुधवार को सलमान्या साइलो केंद्र पहुंचे और वहां की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने किसानों के साथ मिलकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तत्काल गेहूं खरीदी शुरू करने की मांग उठाई।
राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जमीनी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी में देरी के कारण किसान अपनी उपज को मंडियों में औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
प्रशासन मौके पर पहुंचा
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही बड़ौदा तहसीलदार एसडी राठौर मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों और साइलो प्रबंधन से चर्चा कर जल्द से जल्द खरीदी शुरू कराने का आश्वासन दिया। तहसीलदार ने कहा कि तकनीकी और व्यवस्थागत कारणों से थोड़ी देरी हुई है, लेकिन जल्द ही सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर खरीदी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किसानों का फूटा गुस्सा
किसानों ने प्रशासन के आश्वासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बार उन्हें इसी तरह के वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में कोई सुधार नहीं होता। किसानों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार करते हैं, लेकिन जब उसे बेचने का समय आता है, तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक किसान ने बताया कि “हम लोग कई दिनों से यहां बैठे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। हमारी फसल खराब हो रही है और हमें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।”
आर्थिक नुकसान का खतरा
खरीदी शुरू नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के बजाय किसान मजबूरी में व्यापारियों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचने को विवश हो रहे हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि समय पर खरीदी शुरू नहीं की गई, तो इसका असर पूरे जिले की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही खरीदी शुरू नहीं की गई, तो किसानों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अब चुप बैठने वाले नहीं हैं और अपने हक के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी खरीदी केंद्रों पर तुरंत आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
व्यवस्था सुधारने की जरूरत
इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। हर साल खरीदी के समय ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। जरूरत है कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से काम करें और किसानों को समय पर उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
निष्कर्ष
श्योपुर जिले में गेहूं खरीदी को लेकर उत्पन्न स्थिति ने किसानों की समस्याओं को उजागर कर दिया है। एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने आश्वासन पर कितना खरा उतरता है और कब तक किसानों की समस्या का समाधान हो पाता है। फिलहाल, सलमान्या साइलो केंद्र पर किसान खरीदी शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं और उनकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

