वेनेजुएला की वर्किंग प्रेसिडेंट बोलीं 15 मिनट में फैसला लेना था, नहीं तो सैनिक गोली मार देते

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वेनेजुएला। की कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज का एक वीडियो लीक हुआ है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अमेरिकी सैनिकों ने पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करने के बाद सरकार के मंत्रियों को केवल 15 मिनट का समय दिया था। चेतावनी दी गई थी कि शर्तें न मानने पर सभी को गोली मार दी जाएगी।
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक यह खुलासा करीब दो घंटे चली एक बैठक की लीक रिकॉर्डिंग में हुआ है। यह बैठक अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के सात दिन बाद हुई थी। इस वीडियो को सबसे पहले स्थानीय पत्रकारिता समूह ला होरा दे वेनेजुएला ने सामने लाया।
देश को बचाने के लिए मानी शर्तें
वीडियो में रोड्रिग्ज कहती हैं कि अमेरिका की धमकियों और ब्लैकमेलिंग के बीच उन्हें फैसले लेने पड़े। मुझे बातें माननी पड़ीं क्योंकि धमकियां लगातार हो रही थीं। देश को आंतरिक संघर्ष से बचाना था। मेरी प्राथमिकता राजनीतिक सत्ता को बचाना था। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने उनकी तारीफ की, क्योंकि उन्होंने अमेरिका की कई मांगें मान ली थीं।
संचार मंत्री ने किया बचाव
वीडियो में संचार मंत्री फ्रेडी नान्येज भी नजर आए। उन्होंने रोड्रिग्ज का समर्थन करते हुए कहा कि उनके खिलाफ चल रही अफवाहें रोकी जानी चाहिए, क्योंकि वही राष्ट्रपति और प्रथम महिला को सुरक्षित वापस देश ला सकती हैं।
एक्सपर्ट का शक– कहानी भी हो सकती है
राजनीतिक विशेषज्ञ मार्गरिटा लोपेज माया ने कहा कि संभव है रोड्रिग्ज खुद को सही ठहराने के लिए यह कहानी गढ़ रही हों। उनका कहना है कि मादुरो को हटाना अंदरूनी मदद के बिना संभव नहीं था और सरकार अब खुद को बचाने की रणनीति बना रही है।
वेनेजुएला पर हमले की 3 बड़ी वजहें
अमेरिका का आरोप– वेनेजुएला अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा था।
ड्रग्स तस्करी का बड़ा रास्ता बनने का दावा।
मादुरो की नीतियों से लाखों लोगों का पलायन।
30 मिनट में पूरा ऑपरेशन
ट्रम्प के मुताबिक 3 जनवरी को अमेरिकी सेना ने कराकस में अंधेरे का फायदा उठाकर ऑपरेशन किया। राष्ट्रपति भवन की बिजली काट दी गई और 30 मिनट से कम समय में मादुरो को गिरफ्तार कर लिया गया।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया कि इस ऑपरेशन की महीनों तक रिहर्सल की गई थी। मादुरो की आदतों, दिनचर्या और सुरक्षा व्यवस्था तक की पूरी जानकारी अमेरिकी सेना के पास थी।
