छतरपुर/बागेश्वर धाम (रोहित पाठक)। आध्यात्मिक जगत की दो ऐसी महान विभूतियां, जिनके एक इशारे पर दुनिया भर में लाखों अनुयायी उमड़ पड़ते हैं, आज एक साथ एक ही मंच पर नजर आने वाली हैं। दक्षिण भारत में सनातन का शंखनाद करने वाले ईशा फाउंडेशन के संस्थापक पूज्य जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) आज पहली बार बुंदेलखंड की पावन धरा बागेश्वर धाम के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। यह क्षण केवल एक मुलाकात भर नहीं है, बल्कि सनातन धर्म की एकता और शक्ति का वह प्रतीक बनने जा रहा है, जिसकी चर्चा सात समंदर पार तक होनी तय है।


बालाजी की चौखट पर सजेगी संतों की सभा इस ऐतिहासिक मिलन का साक्षी बनने के लिए बागेश्वर धाम में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। जानकारी के अनुसार, पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और सद्गुरु जग्गी वासुदेव दोनों एक साथ मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे। विश्व प्रसिद्ध योगिक चेतना के ध्वजवाहक और बालाजी की महिमा का डंका बजाने वाले धीरेंद्र शास्त्री जब एक साथ बालाजी महाराज के चरणों में मत्था टेकेंगे, तो वह नजारा किसी महाकुंभ से कम नहीं होगा। बागेश्वर धाम परिवार ने इस स्वागत के लिए अभूतपूर्व तैयारियां की हैं।


क्यों खास है यह मिलन?

वैश्विक शांति बनाम सनातन संकल्प: एक ओर सद्गुरु हैं जिन्होंने योग और ध्यान के जरिए वैश्विक शांति का संदेश दिया है, तो दूसरी ओर पंडित धीरेंद्र शास्त्री हैं जो सनातन संस्कृति की रक्षा और हिंदू गौरव की पुनर्स्थापना का बिगुल फूंके हुए हैं।