डेढ़ साल का इंतजार खत्म, जब मां और बेटे का हुआ मिलन, तो हर आंख हो गई नम

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मंदसौर,ललित शंकर धाकड़ । मानवता और सेवा का भावुक अध्याय उस वक्त लिखा गया, जब अनामिका जनकल्याण सेवा समिति के विक्षिप्त महिला आश्रय गृह ने डेढ़ साल से बिछड़ी एक मां को उसके बेटे से मिलाया। उत्तर प्रदेश की रहने वाली सूरजमुखी, जो भटकते हुए मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ क्षेत्र में पहुंच गई थीं, आज अपने बेटे दीपक कुमार के साथ घर लौट सकीं।
जानकारी के अनुसार, करीब 9 जनवरी 2025 को मल्हारगढ़ पुलिस ने विक्षिप्त अवस्था में मिली महिला को अनामिका जनकल्याण सेवा समिति के आश्रय गृह को सौंपा था। इसके बाद संस्था ने महिला की नियमित देखभाल, इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था की। दशपुर बिसा पोरवाल सोशल ग्रुप के सहयोग से उपचार के बाद महिला की स्थिति में सुधार हुआ।
संस्था की संस्थापक समाजसेविका अनामिका जैन व उनकी टीम ने सोशल मीडिया और काउंसलिंग के माध्यम से महिला के परिजनों की तलाश शुरू की। प्रयासों के परिणामस्वरूप सबसे पहले महिला के भाई से संपर्क हुआ और फिर बेटे दीपक कुमार तक सूचना पहुंची।
दीपक कुमार, जो उत्तर प्रदेश के फतेहाबाद जिला के भारौल निवासी हैं, ने बताया कि काम के सिलसिले में बाहर जाने के बाद परिवार में मां की देखभाल की जिम्मेदारी छोटे भाई को दी थी। इसी दौरान मां घर से निकल गईं और लंबे समय तक उनकी तलाश इटावा, गाजियाबाद और पुरानी दिल्ली सहित कई स्थानों पर की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
करीब डेढ़ साल बाद जब अनामिका जैन का फोन आया, तो मानो जीवन की सबसे बड़ी खुशी मिल गई।बुधवार को दीपक कुमार अपने साथी के साथ मंदसौर पहुंचे। सालों बाद मां-बेटे के मिलन का दृश्य बेहद भावुक था—मां को देखते ही बेटे की आंखें भर आईं और मां भी बेटे को गले लगाकर रो पड़ीं। इसके बाद दीपक अपनी मां सूरजमुखी को साथ लेकर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गया।
यह मिलन न सिर्फ एक परिवार की खुशी है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सेवा भावना की जीवंत मिसाल भी है।
