छतरपुर। महोबा रोड स्थित ऐतिहासिक जानराय टोरिया मंदिर में आस्था और स्थापत्य का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली 51 फीट ऊंची अष्टधातु से निर्मित भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इस अद्वितीय प्रतिमा के अनावरण और प्राण-प्रतिष्ठा के लिए आगामी 24 मार्च से 9 दिवसीय विशाल धार्मिक महोत्सव का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन का भव्य समापन 2 अप्रैल को हनुमान जयंती (प्रकटोत्सव) के पावन अवसर पर होगा, जिसमें देशभर से आए पूज्य संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में प्रतिमा का विधिवत अनावरण संपन्न होगा।


कलश यात्रा के साथ शुरू होगा धार्मिक महाकुंभ

आयोजन की शुरुआत एक विशाल और भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। महोत्सव के दौरान नौ दिनों तक विविध धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिर के महंत भगवान दास श्रृंगारी महाराज ने इस महाआयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। मंदिर प्रांगण में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शहर के विभिन्न हिंदू संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, जहाँ आयोजन की सफलता का संकल्प लिया गया।


18 समितियों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारियां

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आयोजन की विशालता को देखते हुए व्यवस्थाओं के लिए कुल 18 विशेष समितियों का गठन किया गया है। मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी लोकेश चौरसिया के अनुसार, इन समितियों में कलश यात्रा, आपातकालीन व्यवस्था, अतिथि एवं संत सत्कार, मीडिया प्रबंधन, साज-सज्जा, प्रशासनिक समन्वय, भंडारा, आवास, पार्किंग, पेयजल और मंच संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल हैं। प्रत्येक समिति को स्पष्ट दायित्व सौंपे गए हैं ताकि 9 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।


छतरपुर के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर

अष्टधातु से निर्मित इतनी ऊंची प्रतिमा का निर्माण छतरपुर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा। आयोजन समिति का मानना है कि यह केवल एक मंदिर का उत्सव नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड के लिए गौरव का क्षण है। महोत्सव के अंतिम दिन होने वाला कवि सम्मेलन और भंडारा आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगे। प्रशासन और मंदिर समिति के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए भी विशेष टीम सक्रिय है, जिससे आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।