पन्ना/गुनौर, जीतेन्द्र रजक। गुनौर क्षेत्र की शासकीय माध्यमिक शाला घटारी की शिक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल में कुछ शिक्षक उपस्थिति दर्ज कराने के बाद निर्धारित समय तक विद्यालय में रुकने के बजाय चले जाते हैं। यदि आरोप सही हैं, तो इसका सीधा असर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं, लेकिन शिक्षकों की नियमित मौजूदगी नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका सवाल है कि जब शिक्षक ही स्कूल में निर्धारित समय तक मौजूद नहीं रहेंगे, तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल सकेगी।
अटेंडेंस के बाद स्कूल से जाने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ शिक्षक स्कूल पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और इसके बाद विद्यालय से चले जाते हैं। ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति रजिस्टर, अटेंडेंस और मौके पर उनकी वास्तविक मौजूदगी की जांच की जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पढ़ते हैं, जिनके परिवार निजी स्कूलों का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में यदि शिक्षकों की गैरमौजूदगी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं बच्चों को उठाना पड़ता है।
संकुल स्तर की निगरानी पर भी सवाल
शासकीय माध्यमिक शाला घटारी, संकुल ककरहटी के अंतर्गत आती है। स्कूल में शिक्षकों की कथित अनियमित उपस्थिति को लेकर ग्रामीणों ने संकुल स्तर से लेकर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी बिना पूर्व सूचना के स्कूल का औचक निरीक्षण करें और शिक्षकों की उपस्थिति की वास्तविक स्थिति की जांच करें। साथ ही अटेंडेंस रजिस्टर और विद्यालय में शिक्षकों की मौजूदगी का मिलान किया जाए।
जांच के बाद कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में शिक्षकों के निर्धारित समय से पहले स्कूल छोड़ने की पुष्टि होती है, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही होने से इन प्रयासों पर सवाल खड़े होते हैं।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग घटारी के शासकीय माध्यमिक स्कूल में लगाए जा रहे इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।













