नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार के मोकामा से जुड़े अनंत सिंह को सरेंडर करने के लिए 1 दिसंबर तक का समय दिए जाने पर कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि अदालत के आदेश और निर्देशों का पालन होना चाहिए। अपराधी कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और अपराधियों पर लगाम लगाना जरूरी है। वहीं, एक नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली, 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर भाजपा के विरोध प्रदर्शन और व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) की ओर से सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र को लेकर भी प्रतिक्रिया दी।

अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से सरेंडर के लिए एक दिसंबर तक का समय मिलने के सवाल पर मनोज कुमार ने कहा कि अदालत जो आदेश दे रही है, उसका पालन होना चाहिए। अपराधी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। दुलार चंद यादव की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। मामला अदालत में चल रहा है, इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि, उन्हें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जो भी फैसला करेगा, वह अच्छा होगा।

कांग्रेस सांसद ने खड़गे के आवास पर आयोजित कार्यक्रम के संदेश के बारे में कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है। कांग्रेस पहले से आरोप लगाती रही है कि 13.50 करोड़ लोगों के नाम वोटर सूची से काटे गए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और संविधान को कुचलने की कोशिश बताया। मनोज कुमार ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल, जाति या धर्म की नहीं, बल्कि देश और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।

उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे एक नवंबर को दिल्ली पहुंचें और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाएं। जब तक कथित तौर पर वोटर सूची से हटाए गए 13.50 करोड़ लोगों को न्याय नहीं मिलता और ईवीएम पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मनोज कुमार ने हाल में हुए एमएलसी चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान हुआ और एनडीए को कितनी सीटें मिलीं, इसे देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ये चुनाव ईवीएम से होते तो विपक्ष नहीं जीत पाता। बैलेट से निष्पक्ष चुनाव संभव है और चुनाव आयोग को इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने इजरायल में बैलेट से चुनाव होने का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि जब वहां ऐसा हो सकता है तो भारत में क्यों नहीं।

कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को जल्द इस्तीफा देना चाहिए या प्रधानमंत्री मोदी को उन्हें पद से हटाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर कांग्रेस महाभियोग की प्रक्रिया अपनाने की बात कह रही है। संविधान सर्वोच्च है और यदि कोई गलती करता है तो उसके खिलाफ संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा और न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।

एक नवंबर को कांग्रेस की रैली के साथ ही भाजपा द्वारा 1984 के सिख-विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाने के सवाल पर मनोज कुमार ने कहा कि राहुल गांधी की कामयाबी है कि लोग आज सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा अपना काम कर रही है, लेकिन अब देश के लोग उसके बारे में समझ चुके हैं। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। मनोज कुमार ने कहा कि महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी बढ़ रही है और शिक्षा और स्वास्थ्य के हालात भी खराब हैं। इन मुद्दों को लेकर लोग घरों से बाहर निकलेंगे और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि एक नवंबर की रैली किसी एक पार्टी, जाति या धर्म की नहीं होगी। इसमें सभी राजनीतिक दलों, जातियों, धर्मों और संप्रदायों के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य संविधान, लोकतंत्र और देश को बचाने के लिए आवाज उठाना तथा वोट चोरी के खिलाफ संघर्ष करना है।

व्यापारी संगठन सीटीआई की ओर से सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र के संबंध में मनोज कुमार ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर चांदनी चौक के कई व्यापारियों के बयान देखे हैं। कुछ व्यापारी राहुल गांधी का स्वागत करने और उनके साथ खड़े होने की बात कह रहे हैं। उन्होंने उन व्यापारियों से भी अपील की जो रैली को लेकर चिंता जता रहे हैं। कांग्रेस हमेशा व्यापारियों का सम्मान करती है और उन्हें देश के हित को समझना चाहिए। देश रहेगा तभी दुकान और कारोबार भी रहेंगे।

कांग्रेस सांसद ने व्यापारियों से लोकतंत्र में वोट देने के अधिकार को बचाने की लड़ाई में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य व्यापारी और कारोबारी इस मुद्दे पर समर्थन दे रहे हैं, उसी तरह बाकी व्यापारियों को भी आगे आकर सहयोग करना चाहिए। यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है।