छतरपुर ऑडिटोरियम में गूंजे सूफी तराने और पंडवानी, दर्शक हुए भावविभोर

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छतरपुर, शिवम सोनी। शहर के ऑडिटोरियम में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं जिला प्रशासन छतरपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित संस्कृति विरासत कला उत्सव के छठवें दिन शुक्रवार की शाम पंडवानी,सूफी और भक्ति संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में प्रसिद्ध सूफी गायिका अंशिका रजोतिया एवं सुप्रसिद्ध गायिका सम्प्रिया पूजा ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।सूफी कव्वालियों पर तो दर्शक अपनी सीट से खड़े होकर झूमते नज़र आए।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।छतरपुर विधायक ललिता यादव, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा,महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव हर्षित ताम्रकार,पूर्व प्राचार्य भगवानदास शुक्ला और समाजसेवी शंकरलाल सोनी,प्रसिद्ध सारंगी वादक विनोद पवार ने दीप प्रज्ज्वलन करके कार्यक्रम की शुरुवात की जिसके बाद कलाकारों ने मंच संभाला।
सम्प्रिया पूजा ने दर्शकों में भर दिया जोश
कार्यक्रम की शुरुवात अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सम्प्रिय पूजा के पंडवानी गायकी के साथ हुई। सम्प्रिय पूजा पंडवानी गायकी की ख्यातिनाम कलाकार तीजन बाई की शिष्या हैं।वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पांच सौ से ज्यादा प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।आज के कार्यक्रम में उन्होंने श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को पांच गांव देने के प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के पास जाने की कथा का ओजस्वी वर्णन ओजपूर्ण शैली में किया।संगत कलाकारों ने उसमें जादुई असर डाला और दर्शक मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
छत्तीसगढ़ी बोली में सुनाई गई इस कथा का बीच में वर्णन करते हुए लगभग 45 मिनट की इस प्रस्तुति में दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों को भरपूर स्नेह दिया।
15 वर्षीय कलाकार अंशिका ने सूफी गायन से किया मंत्रमुग्ध
छतरपुर की बेटी,छोटा पैकेट बड़ा धमाल अंशिका रजोतिया ने अपने गायन की शुरुवात सुप्रसिद्ध भजनों के साथ की।उसके पश्चात सूफी अंदाज़ में “ये जो हल्का-हल्का सुरूर है”,"काली काली जुल्फों के फंदे न डालो","आजा वे माही","कहना गलत गलत तो छुपाना सही सही" जैसी लोकप्रिय ग़ज़ल सुनाई।“राम को देख जनक नंदिनी” और अन्य भजन सुनकर श्रोता वाह वाह कर उठे। इसके बाद लगभग एक घंटे तक अंशिका ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को अपनी सीट से उठकर झूमने को मजबूर कर दिया।
दोनों कलाकारों की गायकी में शास्त्रीयता, भाव, मुरकियाँ और सूफियाना रंग का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिस पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी।
अतिथियों ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
एस पी अगम जैन ने भेंट की पुस्तक कभी गांव कभी कॉलेज
कार्यक्रम में पधारे एस पी अगम जैन ने दोनों कलाकारों की गायकी को सराहते हुए इस आयोजन को छतरपुर की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने हेतु एक महत्वपूर्ण आयाम मानते हुए निदेशक सुदेश शर्मा को अपनी पुस्तक कभी गांव कभी कॉलेज भी भेंट की और सम्प्रिय पूजा से मुलाक़ात कर उनके और अंशिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। स्थानीय संयोजक शिवेन्द्र शुक्ला ने बताया कि नगर विकास मंच के अध्यक्ष अरविंद गोस्वामी और सदस्यों शिवव्रत तिवारी ,शशांक गोस्वामी, रवि चौधरी, वीरू गोस्वामी, हर्ष पाठक तथा शैलेंद्र कौशिक ने उत्कृष्ट कार्यक्रम विरासत की सौगात देने के लिए उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा का आभार जताते हुए शॉल,श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर उनको सम्मानित किया।देर शाम तक चले इस आयोजन ने दर्शकों को भक्ति और सूफी संगीत की अविस्मरणीय अनुभूति प्रदान की।कार्यक्रम का संचालन नीरज खरे ने किया।
