दिमाग की थकान के संकेत, रोजमर्रा की भूलें क्यों बनती हैं चेतावनी

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रोजमर्रा की जिंदगी में काम करते करते न केवल शरीर बल्कि दिमाग भी थकने लगता है। कभी किसी काम से कमरे में जाकर यह भूल जाना कि वहां क्यों आए थे या फिर किसी जाने पहचाने व्यक्ति का नाम जुबान पर आकर भी याद न आना आम बात लगती है। अक्सर लोग इसे नींद की कमी, तनाव या ज्यादा काम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब ऐसी स्थितियां बार बार होने लगें तो यह दिमाग की सेहत को लेकर चेतावनी भी हो सकती है।
भागदौड़ भरी जिंदगी में हम शरीर का ख्याल तो रखते हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ पर उतना ध्यान नहीं देते। दिमाग को एक्टिव और हेल्दी रखने के लिए उसे रोजाना छोटे छोटे चैलेंज देना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार एक साथ दो अलग तरह के काम करना दिमाग की सक्रियता बढ़ाने में मदद करता है। टहलते समय उल्टी गिनती करना या संगीत सुनते हुए घरेलू काम करना ब्रेन और बॉडी के बीच तालमेल को मजबूत करता है।
मेमोरी को तेज करने के लिए देखने और याद रखने की आदत भी कारगर मानी जाती है। किसी तस्वीर, कमरे या अखबार के पन्ने को कुछ देर ध्यान से देखने के बाद आंखें बंद कर उसके रंग और जगह को याद करने की कोशिश करने से दिमाग बारीक बातों पर ज्यादा फोकस करना सीखता है। इससे याददाश्त और एकाग्रता दोनों में सुधार होता है।
जानकारी को सीधे रटने के बजाय उसे छोटे हिस्सों में बांटना भी दिमाग के लिए फायदेमंद होता है। लंबी डिटेल या नंबर को टुकड़ों में याद करने से वर्किंग मेमोरी मजबूत होती है। यही कारण है कि यह तरीका छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी माना जाता है।
दिमाग को शांत और केंद्रित रखने के लिए रोज कुछ मिनट सांसों पर ध्यान देना भी जरूरी है। शांति से बैठकर केवल अपनी सांसों पर फोकस करने से दिमाग की निर्णय लेने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती है। इसके साथ ही कुछ नया सीखते रहना दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का सबसे असरदार तरीका माना जाता है। नई भाषा सीखना, कोई वाद्य यंत्र बजाना या रोजमर्रा के रास्तों में बदलाव करना दिमाग में नए न्यूरल कनेक्शन बनाता है और उम्र के साथ होने वाली मानसिक थकान को कम करता है।
