शिक्षा और अनुसंधान के लिए अमूल्य योगदान: स्व. गणेश प्रसाद का देहदान चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा

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सागर, मध्यप्रदेश: मानवता और समाजहित की मिसाल पेश करते हुए स्वर्गीय गणेश प्रसाद के परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के एनाटॉमी विभाग को शिक्षण एवं अनुसंधान कार्य हेतु देहदान स्वरूप समर्पित किया। परिजनों की सहमति और स्वर्गीय श्री गणेश प्रसाद की पूर्व इच्छा के अनुरूप उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा में उपयोग के लिए स्वीकार किया गया।
महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि स्व. गणेश प्रसाद ने 22 अक्टूबर 2025 को स्वयं देहदान के लिए आवेदन पत्र भरा था। निधन के उपरांत मात्र 15 घंटे में शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार संपूर्ण देहदान प्रक्रिया पूर्ण की गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर, एनाटॉमी विभाग के समस्त स्टाफ एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने कहा कि समाजोपयोगी और राष्ट्रहित के इस महान कार्य के लिए स्व. गणेश प्रसाद और उनके परिवार के प्रति महाविद्यालय सदैव सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करता रहेगा। यह बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में चौथा देहदान है, जिसे शासन के आदेशानुसार गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष ने देहदाता के परिवार को धन्यवाद ज्ञापित किया और इस पुण्य कार्य के लिए आभार व्यक्त किया। महाविद्यालय परिवार ने कहा कि इस तरह का देहदान न केवल चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए अमूल्य शिक्षण साधन है, बल्कि समाज में जागरूकता और प्रेरणा का भी स्रोत बनता है।
स्व. श्री गणेश प्रसाद की आयु 79 वर्ष थी। उनके परिजन सर्जन सिंह हैं और उनका पता वार्ड नंबर 10, चोर बावड़ी, बेगमगंज, जिला रायसेन है।
