विरासत उत्सव में संत तुकाराम नाटक ने जीता दर्शकों का दिल

Advertisement
छतरपुर(शिवम सोनी)। शहर के ऑडिटोरियम में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं जिला प्रशासन छतरपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय सांस्कृतिक विरासत कला उत्सव के तीसरे दिन संत तुकाराम पर आधारित नाटक का भव्य मंचन किया गया। इस अवसर पर धुरंधर फिल्म के चर्चित अभिनेता संजय मेहता ने संत तुकाराम की भूमिका निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने सशक्त अभिनय से उन्होंने संत तुकाराम के त्याग, भक्ति और समाज सुधार के संदेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायाधीश विष्णु प्रसाद सोलंकी, विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव, प्रो. जे.पी. मिश्र (पूर्व कुलसचिव, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय), नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया, समाजसेवी प्रेमनारायण मिश्रा और मनीष दोसाज द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। अतिथियों ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
नाटक के दौरान संत तुकाराम के जीवन संघर्ष, सामाजिक कुरीतियों के विरोध और मानवता के संदेश को प्रभावशाली संवादों व भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और संगीत ने नाटक को और भी प्रभावी बना दिया। ऑडिटोरियम में मौजूद दर्शक पूरे समय नाटक से जुड़े रहे और अंत में तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इन्होंने निभाई भूमिका
नाटक संत तुकाराम में प्रमुख भूमिका में जहां स्वयं निर्देशक संजय मेहता थे तो वहीं उनकी पत्नी की प्रभावशाली भूमिका वरिष्ठ रंगकर्मी रंजना तिवारी ने निभाई।अन्य सहयोगी कलाकारों में मोहम्मद फ़ैज़ान, चित्रांश कुमार ,ग्रीक चंडालिया, रूपेश तिवारी, प्रेम सुरवाडे ,विश्वेश कवर्शे,प्रेमप्रकाश अष्ठाना, अंकिता पाल, गायत्री निगम आदि मौजूद रहे।
रूप सज्जा सीमा मौरे की थी तो वहीं संगीत संजय मेहता और जमीर हुसैन का था।संगीत संचालन प्रिंस मलिक,नीरज प्रजापति ने किया।
इस नाटक में गीत आदित्य शर्मा ने लिखे थे तो वहीं संत तुकाराम के अभंगों का प्रयोग भी खूबसूरती से किया गया।नाटक का लेखन और निर्देशन संजय मेहता का था।
सांस्कृतिक विरासत उत्सव का यह दिन कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम के रूप में यादगार बन गया।
