महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम, 8 मार्च का क्या है इतिहास?

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हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का सम्मान किया जाता है। साथ ही महिलाओं के अधिकार, समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1908 में अमेरिका में कामकाजी महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों से मानी जाती है। इसके बाद 1917 में रूस की महिला कार्यकर्ताओं ने “रोटी और शांति” की मांग को लेकर आंदोलन किया, जिसने इस दिन को और महत्वपूर्ण बना दिया। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1975 में 8 मार्च को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मान्यता दी।
इतिहास के अनुसार सबसे पहला महिला दिवस 28 फरवरी 1909 को अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका द्वारा मनाया गया था। वर्ष 1910 में जर्मन समाजसेवी क्लारा जेटकिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद धीरे-धीरे यह दिन दुनिया भर में मनाया जाने लगा।
8 मार्च की तारीख इसलिए खास मानी जाती है क्योंकि 1917 में इसी दिन रूसी महिलाओं ने भूख और युद्ध के खिलाफ हड़ताल की थी। बाद में यह आंदोलन महिलाओं को मताधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
इस दिन का मुख्य उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करना है। महिला दिवस का जामुनी रंग न्याय, सम्मान और गरिमा का प्रतीक माना जाता है।
भारत में भी हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। वहीं देश में राष्ट्रीय महिला दिवस 13 फरवरी को महान स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
