UGC के नए नियमों के खिलाफ यूपी में तीसरे दिन भी बवाल, छात्र सड़क पर उतरे BJP में भी बढ़ी असंतोष की लहर

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लखनऊ। यूपी में UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने धरना देकर ‘UGC नियम वापस लो’ के नारे लगाए। वहीं, कई जिलों में सवर्ण समाज के युवाओं और छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
राजनीतिक स्तर पर भी विरोध तेज होता दिख रहा है। बुलंदशहर में 11 बूथ अध्यक्षों ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। फर्रुखाबाद में BJP आईटी सेल के मंडल संयोजक ने भी अपना पद छोड़ दिया। बुधवार देर शाम मऊ में 5 बूथ अध्यक्षों समेत 20 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दिया।
बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर UGC के नए नियमों में संशोधन की मांग की। उन्होंने कहा कि ये नियम समाज में अलगाववाद पैदा करेंगे और छात्रों के बीच जातिवाद का जहर घोलने की कोशिश है। डॉ. महेश शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई।
बुधवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे BJP विधायक अवधेश सिंह UGC से जुड़े सवालों पर असहज नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें नए नियमों की जानकारी नहीं है और विपक्ष सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल सनातन को बांटने वाला है। उन्होंने कहा कि सवर्ण, पिछड़े और दलित समाज को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जिलों में अनोखे तरीके अपनाए गए। पीलीभीत में युवकों ने मुंडन कराकर विरोध जताया। गाजियाबाद में प्रदर्शनकारियों ने कफन पहनकर और जंजीर डालकर प्रदर्शन किया। देवरिया और मेरठ में पुलिस से नोकझोंक की स्थिति बन गई।
अयोध्या में भाजयुमो जिलाध्यक्ष और वाराणसी में BJP जिला कार्यसमिति सदस्य ने इस्तीफा दे दिया। औरैया में भी तीन BJP नेताओं ने जिलाध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा। कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने कहा कि कहीं ऐसा न हो जाए कि सवर्ण होना ही अपराध बन जाए।
UGC के नए नियमों का विरोध क्यों?
UGC ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ को नोटिफाई किया। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें गठित करने के निर्देश हैं, जो खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर काम करेंगी।
सरकार का कहना है कि ये नियम निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए हैं, जबकि विरोध कर रहे छात्रों और संगठनों का आरोप है कि इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों को ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह देखा जाएगा और कैंपस में भेदभाव व अराजकता बढ़ सकती है।
