छिंदवाड़ा, जीशान खान। जिले में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जिले के 73 शासकीय प्राइमरी और मिडिल स्कूलों की मरम्मत का काम सरकारी फंड के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर जर्जर भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है, लेकिन स्कूल भवनों की हालत अब भी नहीं सुधर सकी है।


जानकारी के अनुसार, पिछले साल जिला शिक्षा केंद्र द्वारा वार्षिक कार्ययोजना में जिले के 86 जर्जर स्कूल भवनों के सुधार की मांग शासन को भेजी गई थी। इनमें भवनों और शौचालयों की मरम्मत कराए जाने का प्रस्ताव शामिल था। शासन स्तर से 73 स्कूलों के लिए मरम्मत की स्वीकृति भी जारी कर दी गई थी और कुछ स्थानों पर काम शुरू भी हुआ, लेकिन बीच में सरकारी फंड रुक जाने से एजेंसियों ने निर्माण कार्य बंद कर दिया।


बताया जा रहा है कि 73 में से केवल 7 स्कूलों में ही मरम्मत कार्य शुरू हो सका, लेकिन वहां भी प्रति स्कूल आधी राशि ही जारी हुई, जिसके चलते कार्य अधूरा रह गया। कई स्कूलों में छतें जर्जर हैं, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और शौचालय उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में हादसे की आशंका भी बढ़ गई है।


स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द फंड जारी कर स्कूलों की मरम्मत पूर्ण कराने की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी फंड जारी होने के बाद कार्य दोबारा शुरू कराने की बात कह रहे हैं।