बॉलीवुड। एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मच-अवेटेड फिल्म ‘मर्दानी 3’ एक बार फिर उन्हें सख्त, बेखौफ और जुझारू पुलिस अफसर शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में पेश करती है। इस बार कहानी सिर्फ क्राइम थ्रिलर नहीं, बल्कि समाज के उस अंधेरे सच को उजागर करती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। फिल्म भिखारी-माफिया जैसे संवेदनशील और घिनौने विषय को केंद्र में रखती है, जो दर्शकों को झकझोर देता है।
फिल्म की शुरुआत बेहद दमदार है। फर्स्ट हाफ में कहानी तेजी से आगे बढ़ती है और दर्शक शुरू से ही स्क्रीन से बंधे रहते हैं। रानी मुखर्जी की एंट्री, उनका बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी पूरी तरह एक सीनियर, अनुभवी और निडर पुलिस ऑफिसर को जस्टिफाई करती है। जांच के दौरान जिस तरह से वह भिखारी माफिया के नेटवर्क की परतें खोलती हैं, वह फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है।
कहानी उन मासूम लोगों के शोषण को दिखाती है, जिन्हें मजबूरी में भीख मांगने पर मजबूर किया जाता है। बच्चों और कमजोर वर्ग के साथ होने वाले अत्याचार को फिल्म बिना लाग-लपेट के दिखाती है, जो कई जगह दर्शकों को असहज भी कर देता है। यही ‘मर्दानी 3’ की सबसे बड़ी ताकत है—यह सच्चाई से भागती नहीं है।
रानी मुखर्जी के अलावा सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा काम किया है, खासकर विलेन का किरदार काफी खौफ पैदा करता है। बैकग्राउंड म्यूजिक सस्पेंस को और गहरा बनाता है। एक्शन सीक्वेंस रियलिस्टिक हैं, बिना जरूरत के ओवर-द-टॉप नहीं लगते।
हालांकि सेकेंड हाफ में कुछ जगह कहानी थोड़ी स्लो होती है और कुछ सीन प्रिडिक्टेबल भी लगते हैं, लेकिन क्लाइमेक्स तक फिल्म फिर से पकड़ बना लेती है। सामाजिक संदेश के साथ फिल्म मनोरंजन भी देती है।
कुल मिलाकर, मर्दानी 3 एक सशक्त, गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म है। रानी मुखर्जी का धाकड़ कॉप अवतार एक बार फिर दर्शकों को प्रभावित करता है। अगर आपको सोशल इश्यू पर आधारित थ्रिलर पसंद हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है।

