सागर/बंडा, जीशान खान। बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर शिवसेना ने सरकार की जवाबदेही तय कराने की कवायद शुरू कर दी है।


शिवसेना उप राज्य प्रमुख पप्पू तिवारी के निर्देश पर जिला प्रभारी विकास सिंह ने मुंबई स्थित शिवसेना भवन पहुंचकर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं लोकसभा सांसद अनिल देसाई से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों और पीड़ित परिवारों की स्थिति की जानकारी सांसद को दी।


मुलाकात के दौरान शिवसेना की ओर से पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग रखी गई। संगठन ने सीबीआई जांच अथवा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की है। शिवसेना का कहना है कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि घटना में वास्तविक रूप से कितनी मौतें हुईं और जहरीली शराब के कारोबार के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।


मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप

शिवसेना ने जिला प्रशासन पर मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप भी लगाया है। संगठन का कहना है कि यदि मृतकों की संख्या या घटना से जुड़े किसी तथ्य को दबाया गया है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आनी चाहिए।


जिला प्रभारी विकास सिंह ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने करीब एक वर्ष पहले ही जिले में बिक रही कथित जहरीली शराब को लेकर शिकायतें की थीं और इस मुद्दे पर आंदोलन भी किया था। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते शिकायतों को गंभीरता से लिया होता तो संभवतः हालात इतने भयावह नहीं होते।

नितिन नादगांवकर से भी की गई मुलाकात की मांग

शिवसेना ने पूरे मामले की जानकारी राष्ट्रीय उपनेता नितिन नादगांवकर को भी दी है। संगठन की ओर से उनसे बंडा पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने और उनकी समस्याओं को सामने उठाने का अनुरोध किया गया है।


शिवसेना राष्ट्रीय संघटक प्रमुख अशोक तिवारी ने कहा कि संगठन बंडा के पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और प्रत्येक मौत की जवाबदेही सरकार से तय कराने के लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने शिवसेना के विधायक दल के जल्द बंडा पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने की बात भी कही।


जहरीली शराब कांड को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वास्तविक मौतों का आंकड़ा कितना है, जहरीली शराब पीड़ितों तक कैसे पहुंची और यदि पहले से शिकायतें की गई थीं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई—इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल शिवसेना ने इस मुद्दे को सड़क से उठाकर संसद तक ले जाने का संकेत देकर मामले को राजनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।