हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा झालमुड़ी खाते हुए एक वीडियो सामने आने के बाद यह पारंपरिक स्ट्रीट फूड फिर से चर्चा में आ गया है। आमतौर पर साधारण और सस्ता समझा जाने वाला यह स्नैक अचानक राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है। जब देश का शीर्ष नेतृत्व किसी स्थानीय व्यंजन को पसंद करता है, तो वह फूड न सिर्फ ट्रेंड करने लगता है बल्कि उसकी सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत हो जाती है। यही वजह है कि पूर्वी भारत का यह लोकप्रिय स्नैक अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है और सोशल मीडिया पर भी लोग इसके स्वाद और खासियत को लेकर लगातार बात कर रहे हैं। इससे छोटे स्ट्रीट वेंडर्स को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलता है, क्योंकि लोगों की रुचि ऐसे पारंपरिक फूड की तरफ बढ़ती है।
क्या है झालमुड़ी और कैसे बनती है?
झालमुड़ी एक पारंपरिक भारतीय स्ट्रीट फूड है, जिसकी जड़ें खासतौर पर West Bengal और Odisha में मिलती हैं। ‘झाल’ का मतलब होता है तीखा और ‘मुड़ी’ यानी मुरमुरा (लईया), इसलिए इसका नाम ही इसके स्वाद को दर्शाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान, तेज और पूरी तरह लाइव होती है, जो इसे देखने में भी दिलचस्प बनाती है। एक बड़े बर्तन या कागज की कोन में पहले कुरकुरा मुरमुरा लिया जाता है, फिर उसमें सरसों का तेल डाला जाता है, जो इसे खास बंगाली फ्लेवर देता है। इसके बाद बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, उबले आलू, धनिया पत्ती और नींबू का रस मिलाया जाता है। कई वेंडर इसमें खास मसाला मिक्स डालते हैं, जो उनके स्वाद को यूनिक बनाता है। अंत में इसे तेजी से मिलाकर तुरंत सर्व किया जाता है, ताकि इसकी कुरकुराहट बनी रहे। यही “तुरंत तैयार और तुरंत खाने” वाली खासियत इसे बाकी स्नैक्स से अलग बनाती है।
क्यों है इतना फेमस?
झालमुड़ी की लोकप्रियता के पीछे कई मजबूत कारण हैं, जो इसे हर उम्र के लोगों का पसंदीदा बनाते हैं। सबसे पहले इसका यूनिक स्वाद—तीखा, खट्टा, हल्का मसालेदार और कुरकुरा—जो एक साथ कई फ्लेवर का अनुभव देता है। दूसरा, यह बेहद किफायती होता है, जिससे छात्र, ऑफिस जाने वाले लोग और आम जनता इसे आसानी से खरीद सकती है। तीसरा, यह फास्ट-सर्विंग स्नैक है, जो भीड़-भाड़ वाले इलाकों जैसे रेलवे स्टेशन, बाजार और समुद्र किनारे तुरंत मिल जाता है। इसके अलावा, इसे हल्का और अपेक्षाकृत हेल्दी माना जाता है, क्योंकि इसमें डीप फ्राई नहीं होता और ताजी सब्जियों का इस्तेमाल होता है। यही नहीं, यह चलते-फिरते खाने के लिए भी आसान है, इसलिए इसे “ऑन-द-गो स्नैक” के रूप में भी काफी पसंद किया जाता है। धीरे-धीरे यह स्नैक महानगरों के कैफे और फूड स्टॉल्स तक पहुंच चुका है, जहां इसे नए ट्विस्ट के साथ भी परोसा जा रहा है।
क्या-क्या डलता है इसमें?
झालमुड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका फ्लेक्सिबल और कस्टमाइज्ड इंग्रीडिएंट्स का कॉम्बिनेशन है, जो हर जगह थोड़ा अलग होता है। बेस के तौर पर मुरमुरा (लईया) लिया जाता है, जिसमें सरसों का तेल इसकी पहचान वाला तीखा और सुगंधित स्वाद जोड़ता है। इसके साथ बारीक कटा हुआ प्याज, टमाटर और हरी मिर्च मिलाई जाती है, जो इसे ताजगी और तीखापन देते हैं। उबले हुए आलू इसे थोड़ा भारी और पेट भरने वाला बनाते हैं, जबकि नींबू का रस खट्टापन जोड़ता है। इसके अलावा नमक, चाट मसाला या खास बंगाली मसाला मिक्स डाला जाता है। कई जगह इसमें मूंगफली, भुना चना, सेव या भुजिया, नारियल के छोटे टुकड़े और कच्चा आम भी मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी रिच हो जाता है। कुछ वेंडर इसमें खास चटनी या मसाले का गुप्त मिश्रण भी डालते हैं, जो उनके स्टॉल की पहचान बन जाता है। यही विविधता इसे हर जगह नया स्वाद देने वाली डिश बनाती है।

