छिंदवाड़ा,जीशान अंसारी। पेंच नेशनल पार्क के बफर ज़ोन से लगे गांवों में इन दिनों बाघिन की मौजूदगी से दहशत का माहौल है। लगातार मूवमेंट, मवेशियों के शिकार और अब तक दो ग्रामीणों की मौत के बाद क्षेत्र में भय गहराता जा रहा है। लेकिन इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली और स्थानीय लोगों की लापरवाही दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर सोमवार को चार अलग-अलग वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें गांव के कुछ युवक कार से जंगल के अंदर तक जाकर बाघिन का पीछा करते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, युवक टॉर्च की रोशनी डालकर बाघिन को उकसाते और परेशान करते दिख रहे हैं। यह घटनाक्रम न केवल खतरनाक है, बल्कि वन्यजीव सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन भी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि बाघिन अपने शावकों के साथ क्षेत्र में घूम रही है। ऐसे में उसे बार-बार परेशान करना और उसके करीब जाने की कोशिश करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। बावजूद इसके, स्थानीय स्तर पर न तो लोगों में जागरूकता दिखाई दे रही है और न ही वन विभाग की सख्ती। ग्रामीणों का कहना है कि बाघिन के आतंक से वे पहले ही परेशान हैं और उसे रेस्क्यू करने की मांग कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, वायरल वीडियो ने यह भी उजागर कर दिया है कि कुछ लोग खुद ही अपनी जान जोखिम में डालते हुए जंगल में घुसकर हालात को और बिगाड़ रहे हैं। वन विभाग की ओर से क्षेत्र में ट्रैप कैमरा और गश्ती का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं और वायरल वीडियो इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बाघिन वाकई खतरा है, या फिर इंसानी लापरवाही इस खतरे को बढ़ा रही है? यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी और बड़ी घटना में बदल सकती है।