छतरपुर, संजय अवस्थी। मध्य प्रदेश शासन द्वारा लागू की गई स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने से नाराज पटवारियों का गुस्सा अब सड़कों पर देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला शाखा छतरपुर के आह्वान पर दर्जनों पटवारियों ने एकजुट होकर रैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर जमकर नारेबाजी की। पटवारियों का प्रदर्शन नए नियमों के विरोध में था, जिसके तहत आबादी भूमि के पंजीयन और निष्पादन प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक बनाया गया है। कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस योजना के निष्पादन, ई-केवाईसी और पंजीयन से जुड़े समस्त व्यक्तिगत दायित्व वाले कार्यों से पटवारी संवर्ग को पूर्णत: पृथक रखे जाने की मांग की है।


मप्र पटवारी संघ संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हारून अहमद का कहना है कि जब शासन के पास पृथक से पंजीयन विभाग मौजूद है, तो राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों पर इस तरह का अतिरिक्त प्रशासनिक व कानूनी बोझ डालना पूरी तरह से अनुचित है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र का भू-स्वरूप सामान्य कृषि भूमि से अलग होता है और पंचायत राज व्यवस्था के तहत सर्वेक्षण का कार्य पंचायत विभाग का है। पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने से भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, मालिकाना हक या किसी भी लिपकीय त्रुटि के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से कानूनी विवादों के लिए उत्तरदायी ठहराए जाने की आशंका बनी रहेगी। इसके अलावा, किसान हितैषी फार्मर आईडी और जियो-टैग गिरदावरी में आ रही तकनीकी खामियों के कारण भी पटवारियों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।


पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि वे पूर्व से लंबित अपनी ग्रेड-पे, वेतन विसंगति और कैडर रिव्यू जैसी मूल मांगों के निराकरण न होने से पहले से ही असंतुष्ट हैं। ऐसे में नई योजनाओं का अतिरिक्त कार्य लादे जाने से मैदानी स्तर पर काम करना नामुमकिन होता जा रहा है। पटवारियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें आबादी पंजीयन एवं निष्पादन योजना से तत्काल विरत नहीं किया गया और शासन स्तर से अनावश्यक दबाव बनाया गया, तो पूरे प्रदेश के 55 जिलों के पटवारी आने वाले दिनों में पूर्णत: काम बंद कर कलमबंद हड़ताल करने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।