ऑनलाइन गेम के कर्ज ने पिता को बनाया कातिल; खुदकुशी से पहले पूरे परिवार को पिलाया जहर

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शहडोल। शहडोल की पुरानी बस्ती में ऑनलाइन गेमिंग की लत ने एक परिवार को तबाह कर दिया। मोबाइल कारोबारी शंकर लाल (40) ने 24 फरवरी की रात अपनी पत्नी राजकुमारी गुप्ता (38) और बेटी स्वाति गुप्ता (16) को जहर पिला दिया, इसके बाद खुद भी जहर पी लिया। इलाज के दौरान पहले बेटी स्वाति और फिर गुरुवार रात शंकर लाल की मौत हो गई, जबकि पत्नी राजकुमारी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती है और जिंदगी की जंग लड़ रही है।
मौत से पहले स्वाति ने पुलिस के सामने बयान दिया था। वहीं पड़ोसियों ने बताया कि स्वाति ने फोन कर कहा था कि “पापा ने कुछ पिला दिया है, हमें बचा लो।” शुरुआत में लोगों ने बात को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जब तीनों की हालत बिगड़ने लगी और उल्टियों से तेज बदबू आने लगी, तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
ऑनलाइन गेम में 4 लाख रुपए हारे
परिवार के मुताबिक शंकर लाल को ऑनलाइन गेम बीडीजी और एविएटर खेलने की लत थी। वह इन गेम्स में अब तक करीब चार लाख रुपए हार चुका था। कर्ज बढ़ने और आर्थिक तंगी के कारण वह लगातार तनाव में रहता था।
शंकर लाल पहले मोबाइल की दुकान चलाता था, लेकिन गेमिंग की लत के कारण उसका कारोबार चौपट हो गया। बाद में वह शहडोल में सड़क किनारे मोबाइल एसेसरीज की छोटी सी टेबल लगाकर गुजारा कर रहा था।
एक दिन पहले 50 हजार रुपए गंवाए
भतीजे राजीव गुप्ता ने बताया कि घटना से एक दिन पहले ही शंकर लाल ने गेम में 50 हजार रुपए हार दिए थे। इसके बाद उसने और 20 हजार रुपए का इंतजाम किया। लगातार नुकसान के कारण वह गहरे तनाव में था और कर्ज देने वाले लोग भी दबाव बना रहे थे।
बेटे को जानबूझकर बचाया
परिवार में 15 वर्षीय बेटा अनिकेत भी है, जो 10वीं का छात्र है और उसकी बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। घटना वाले दिन शंकर लाल उसे पेपर दिलाने के बाद बाजार में अपने दोस्त सतीश की दुकान पर छोड़ आया था। पुलिस का मानना है कि वह जानबूझकर बेटे को घर से दूर छोड़कर आया था, ताकि उसे नुकसान न पहुंचे।
बेटी ने दोस्त को फोन कर मांगी मदद
घर पहुंचने के बाद शंकर लाल कोल्ड ड्रिंक लेकर आया और पत्नी-बेटी को पिला दी। कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। तब स्वाति ने पिता के दोस्त सतीश को फोन कर बताया कि “पापा ने हमें कुछ पिला दिया है, लगातार उल्टियां हो रही हैं।”
सतीश और अनिकेत तुरंत घर पहुंचे तो मां-बेटी आंगन में उल्टियां कर रही थीं और शंकर लाल छत पर बेहोश पड़ा मिला। तीनों को अस्पताल ले जाया गया।
दो दिन में दो अंतिम संस्कार
इलाज के दौरान पहले स्वाति की मौत हुई, इसके बाद शंकर लाल ने भी दम तोड़ दिया। अनिकेत ने पहले अपनी बहन और फिर पिता का अंतिम संस्कार किया। परिजन बताते हैं कि जिस उम्र में उसके हाथ में किताबें होनी चाहिए थीं, उस बच्चे ने श्मशान की आग देखी।
ढाई साल से थी गेमिंग की लत
करीबियों के मुताबिक शंकर लाल को ढाई साल से ऑनलाइन गेमिंग की लत थी। वह अक्सर कहता था कि “एक बार बड़ा जीत गया तो सब रिकवर कर लूंगा।” इसी उम्मीद में वह बार-बार पैसे लगाता रहा और कर्ज में डूबता गया।
आईसीयू में भर्ती मां बार-बार बच्चों को याद कर रही
मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती मां राजकुमारी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार वह बार-बार कह रही है कि “मुझे मेरे बेटा-बेटी से मिला दो।”
पुलिस जांच में जुटी
कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मोबाइल जब्त कर लिया है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी और ऑनलाइन गेम में भारी नुकसान को घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।
प्रदेश में ऑनलाइन गैंबलिंग पर सख्ती
मध्यप्रदेश में जुआ और सट्टेबाजी पर पब्लिक गैंबलिंग कानून लागू है। बिना वैध लाइसेंस के पैसे लेकर बेटिंग कराने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अवैध माने जाते हैं। ऐसे में बीडीजी और एविएटर जैसे रियल-मनी गेम्स की वैधता भी संदिग्ध मानी जा रही है।
