एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल: छतरपुर में दवा प्रतिनिधियों ने दिखाई मजबूत एकजुटता

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छतरपुर(संजय अवस्थी)। मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन छतरपुर इकाई ने आज केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी और कार्पोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सक्रिय भागीदारी की। यह हड़ताल मुख्य रूप से चारों श्रम संहिताओं के विरोध में बुलाई गई थी, जिसमें देश भर के लाखों मजदूरों ने हिस्सा लिया। छतरपुर में यूनियन के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हड़ताल में भाग लिया और अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
हड़ताल का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार से चारों श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द करने की मांग था। यूनियन ने मांग की कि सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉयी एक्ट 1976 को बहाल किया जाए। दवा प्रतिनिधियों के लिए वैधानिक कार्य नियमावली बनाई जाए। साथ ही, सरकारी अस्पतालों और चिकित्सालयों में दवा प्रतिनिधियों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए तथा उनके काम करने के अधिकार को सुनिश्चित किया जाए।
राज्य सरकार से की गई प्रमुख मांगों में दवा प्रतिनिधियों के लिए न्यूनतम वेतन 26,910 रुपये घोषित करना, 8 घंटे की कार्य अवधि की अधिसूचना जारी करना और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 2(5) में संशोधन कर दवा एवं बिक्री संवर्धन कर्मचारियों को कर्मकार का दर्जा देना शामिल है।
यूनियन ने नियोक्ताओं से भी मांग की कि सेल्स के नाम पर दवा प्रतिनिधियों पर होने वाला दमन और उत्पीडऩ तुरंत बंद किया जाए। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के माध्यम से उनकी गैर-कानूनी एवं अनैतिक निगरानी रोकी जाए तथा निजता के अधिकार का उल्लंघन न किया जाए।
छतरपुर यूनिट के अध्यक्ष अनुभव तिवारी, उपाध्यक्ष अशोक अनुरागी, सचिव ओमप्रकाश नामदेव एवं रोहित दुबे सहित सभी वर्किंग कमेटी सदस्यों और यूनिट के समस्त सदस्यों ने हड़ताल में पूर्ण सहयोग प्रदान किया। उनकी सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर हड़ताल की मजबूत उपस्थिति दर्ज की गई।
