मैहर प्रशासन पर आदिवासी महिलाओं की पीड़ा का मामला गर्म

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मैहर में आदिवासी महिलाओं की नाराजगी प्रशासन के सामने खुलकर सामने आई है। अमगार गांव की आदिवासी महिलाओं का कहना है कि केजेएस सीमेंट प्लांट की खदान ने उनके 100 साल पुराने रास्ते को तबाह कर दिया है। खदान से सुरक्षित मार्ग देने के बजाय लगभग 100 फुट गहरी खदान की मेड से जबरन रास्ता बना दिया गया है।
आज जब महिलाएं इस गंभीर समस्या के लिए जनसुनवाई में पहुंचीं, तो थोड़ी देरी पर कलेक्टर मैहर पहले ही उठकर जा चुके थे। महिलाओं ने उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर तैनात कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया। कार्यालय के बाहर मौजूद एसडीएम ने भी महिलाओं को ही दोषी ठहराया।
महिलाओं ने देरी का कारण बताया, लेकिन प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी। इस प्रशासनिक बेरुखी पर बसपा और कांग्रेस नेताओं ने भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
मैहर में उठ रहे सवाल स्पष्ट हैं—क्या आदिवासी होना गुनाह है? क्या 100 साल पुराने रास्ते की कीमत शून्य है? और क्या प्रशासन के दरवाजे गरीबों के लिए बंद हैं? जवाब की अब भी उम्मीद है।
