भोपाल। मध्यप्रदेश ने डिजिटल इंडिया के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए सुशासन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा जारी ताजा NeSDA रिपोर्ट (फरवरी 2026) में मध्यप्रदेश को डिजिटल सेवा वितरण के मामले में देश का दूसरा सबसे अग्रणी राज्य घोषित किया गया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि का सार राज्य की उस 'डिजिटल फर्स्ट' नीति में छिपा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की लंबी कतारों को नागरिकों के मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित कर दिया है। 1752 ई-सेवाओं के साथ मध्यप्रदेश अब कर्नाटक के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा ई-गवर्नेंस हब बनकर उभरा है।


NeSDA रिपोर्ट 2026 के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि मध्यप्रदेश ने तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने में छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में मध्यप्रदेश 1752 ऑनलाइन सेवाएं प्रदान कर रहा है, जो इसकी प्रशासनिक दक्षता और ई-गवर्नेंस के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने न केवल सेवाओं की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उनकी सुलभता और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान दिया है।


59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन: आमजन को बड़ी राहत

इस रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि 59 अनिवार्य ई-सेवाओं (Mandatory e-Services) का 100 प्रतिशत डिजिटल क्रियान्वयन है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब प्रदेश के किसी भी नागरिक को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आय, जाति या निवास प्रमाणपत्र और विभिन्न लाइसेंस व परमिट के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। इन सेवाओं के पूर्णतः डिजिटल होने से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है, बल्कि समय की भी भारी बचत हो रही है। टैक्स भुगतान और शिकायत निवारण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं अब एक क्लिक पर उपलब्ध हैं, जो 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' के मंत्र को चरितार्थ करती हैं।


MP e-Service Portal: 56 विभागों की सेवाओं का इकलौता संगम

मध्यप्रदेश में इस डिजिटल क्रांति का मुख्य आधार 'MP e-Service Portal' है। यह पोर्टल राज्य के 56 अलग-अलग विभागों की सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ऑनलाइन आवेदन के साथ-साथ 'एप्लीकेशन ट्रैकिंग' और 'डिजिटल भुगतान' की सुविधा है। चाहे वह स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं हों या राजस्व और परिवहन विभाग की, नागरिकों को अब घर बैठे ही हर जानकारी और सेवा मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को प्रशासन का हिस्सा बनाएगी, ताकि सेवा वितरण को और अधिक स्मार्ट और सटीक बनाया जा सके।


सुलभ प्रशासन और भविष्य की राह

NeSDA रिपोर्ट फरवरी 2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि मध्यप्रदेश डिजिटल सेवा वितरण (Digital Service Delivery) को मजबूत कर पारदर्शी प्रशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्थानीय निकाय से लेकर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक, हर क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन ने शासन की पहुंच को समावेशी बनाया है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि आने वाले समय में मोबाइल आधारित सेवाओं का और अधिक विस्तार किया जाए, जिससे प्रदेश का हर नागरिक सशक्त और तकनीक-युक्त महसूस करे।