भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली नई कलेक्टर गाइडलाइन ने रियल एस्टेट बाजार और आम आदमी को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने मेट्रो ट्रेन रूट के आसपास की जमीनों की दरों को लगातार दूसरे साल भी यथावत रखने का फैसला किया है। इस रणनीतिक कदम का सार उस 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) विजन में छिपा है, जिसके तहत सरकार चाहती है कि मेट्रो ट्रैक के किनारे घर, दफ्तर और बाजार एक ही सघन क्षेत्र में विकसित हों, ताकि नागरिकों को सुगम और आधुनिक जीवनशैली मिल सके।


नई गाइडलाइन के अनुसार, एम्स से करोंद तक बिछाई जा रही 16 किलोमीटर लंबी पहली मेट्रो लाइन (ऑरेंज लाइन) के किनारे की दरें 13,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये प्रति वर्गमीटर के बीच तय की गई हैं। इसमें सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि करोंद क्षेत्र की जमीनें मेट्रो प्रोजेक्ट में सबसे महंगी साबित हुई हैं, जहाँ प्लॉट की रजिस्ट्री दर 40,000 रुपये प्रति वर्गमीटर (यानी करीब 4,000 रुपये प्रति वर्गफीट) तय की गई है। सरकार का तर्क है कि इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं और कमर्शियल रन शुरू होने के बाद यहाँ निवेश की होड़ मचने वाली है।


100 किलोमीटर के दायरे में नई दरों का जाल और TOD का फायदा

प्रशासन ने मेट्रो के एम्स-करोंद और भदभदा-रत्नागिरी (प्रस्तावित) रूट से 50 मीटर के दायरे में आने वाली जमीनों के लिए विशेष दरें निर्धारित की हैं। पिछले साल जहाँ सुभाष ब्रिज, एमपी नगर और रानी कमलापति जैसे क्षेत्रों के लिए अलग से कोई दर तय नहीं थी, वहीं इस साल पूरी लाइन को टीओडी (TOD) के तहत कवर किया गया है। पुराने भोपाल में दरें 12,000 से 15,000 रुपये प्रति वर्गमीटर के बीच रखी गई हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के पास सघन आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करना, ताकि कारों पर निर्भरता कम हो और लोग पैदल या साइकिल से ही अपनी बुनियादी जरूरतों तक पहुँच सकें।


विकास को पंख देने की तैयारी: क्यों नहीं बढ़ाई गई कीमतें?

सरकार का दावा है कि मेट्रो लाइन के किनारे दरें न बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य विकास को गति देना है। यदि दरें बढ़ाई जातीं, तो रजिस्ट्री महंगी होने के कारण निवेश प्रभावित हो सकता था। वर्तमान में 7 किलोमीटर के ट्रैक पर मेट्रो का कमर्शियल रन पहले ही शुरू हो चुका है, और बाकी हिस्से पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। ऐसे में स्थिर दरों के माध्यम से बिल्डरों और खरीदारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे मेट्रो रूट के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ाएं। यह पहल न केवल शहरी नियोजन को व्यवस्थित करेगी, बल्कि भोपाल को एक आधुनिक 'ट्रांजिट हब' के रूप में भी स्थापित करेगी।