पन्ना/अमानगंज, जीतेन्द्र रजक। पन्ना टाईगर रिजर्व के जंगलों की सरहद से सटे पन्ना जिले के ग्राम हिनौती में रविवार की सुबह किसी आम दिन की तरह नहीं थी। सूरज की पहली किरण के साथ ही गांव की गलियों में दहशत ने दस्तक दी, जब ग्रामीणों ने सामने से 'मौत की आहट' यानी एक आदमखोर तेंदुए को अपनी ओर आते देखा। लेकिन इस बार कहानी डरकर भागने की नहीं, बल्कि सूझबूझ और अदम्य साहस की थी।


तेंदुए को देखते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया। लोग छतों पर चढ़ गए और बच्चों को कमरों में कैद कर दिया गया। लेकिन हिनौती के ग्रामीणों ने भागने के बजाय तेंदुए को घेरने की रणनीति बनाई। शोर मचाते हुए ग्रामीणों ने तेंदुए को चारों तरफ से खदेड़ना शुरू किया। घबराया हुआ तेंदुआ बचाव का रास्ता ढूंढते हुए गांव के पास स्थित एक संकरी पुलिया में जा घुसा। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और पुलिया के दोनों छोरों पर बड़े-बड़े पत्थर लगाकर उसे कैद कर दिया। देखते ही देखते खूंखार शिकारी अब ग्रामीणों के बनाए 'प्राकृतिक पिंजरे' में बंद हो चुका था।


मोर्चे पर वन अमला और पुलिस

खबर जंगल की आग की तरह फैली और कुछ ही देर में अमानगंज पुलिस व वन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिया के चारों ओर अब खाकी और वनकर्मियों का पहरा है। वन विभाग के विशेषज्ञ तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए जाल और पिंजरे का इंतजाम कर रहे हैं। हालांकि, यह ऑपरेशन किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि संकरी पुलिया के भीतर तेंदुआ बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है।


दहशत के साये में अमानगंज: आखिर कब थमेगा टकराव?

अमानगंज क्षेत्र के लिए वन्यजीवों का बस्तियों में आना अब नई बात नहीं रह गई है। पिछले कुछ महीनों से इस इलाके में बाघ और तेंदुओं की धमक बढ़ गई है।आए दिन मवेशियों के शिकार और इंसानों पर हमलों की खबरों से ग्रामीण सहमे हुए हैं। तेंदुए के पकड़े जाने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में तमाशबीन वहां जुट गए हैं। वहीं पुलिस प्रशासन लाउडस्पीकर के जरिए लगातार लोगों को भीड़ न लगाने और पुलिया से दूर रहने की हिदायत दे रहा है, ताकि रेस्क्यू के दौरान कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए।


फिलहाल, वन विभाग की टीम बेहोशी की दवा और रेस्क्यू गन के साथ तेंदुए की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। विभाग की पहली प्राथमिकता तेंदुए को बिना चोट पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़कर वापस घने जंगल में छोड़ने की है। हिनौती की यह पुलिया आज जिले के सबसे बड़े ऑपरेशन का केंद्र बनी हुई है, जहां इंसान और वन्यजीव के बीच के संघर्ष को खत्म करने की जद्दोजहद जारी है।