बमीठा। केन-वेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले ढोडन बांध का निर्माण कार्य लगातार दसवें दिन भी पूरी तरह ठप रहा। आंदोलनकारियों के विरोध के चलते काम बंद होने से निर्माण एजेंसी एनसीसी कंपनी को करोड़ों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, आंदोलन अब और तेज हो गया है—प्रदर्शनकारियों ने केन नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जानकारी के मुताबिक, ढोडन बांध निर्माण को लेकर प्रभावित आदिवासी समुदाय पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। दसवें दिन आंदोलनकारियों ने केन नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया, जिससे माहौल और गरमा गया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहा है और दमनकारी रवैया अपना रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि कलेक्टर और एसडीएम मौके पर आकर उनसे सीधे संवाद करें, तो 80 प्रतिशत समस्याओं का समाधान तत्काल निकल सकता है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं और आंदोलनकारियों से बात करने के लिए तैयार नहीं हैं।
आंदोलन स्थल पर हालात काफी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। तेज धूप और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच आदिवासी परिवार धरने पर डटे हुए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और महिलाओं को हो रही है। कई आदिवासी महिलाएं दो-दो महीने के शिशुओं को गोद में लेकर प्रदर्शन में शामिल हैं और दिनभर कड़ी धूप में बैठने को मजबूर हैं। आसपास कहीं छाया तक उपलब्ध नहीं है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।
इधर, निर्माण कार्य ठप होने से एनसीसी कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जल्द ही प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो परियोजना में और देरी हो सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अपील की है कि वह अपनी जिद छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाए, ताकि आंदोलन का समाधान निकल सके और ढोडन बांध का निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सके। फिलहाल, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सभी की निगाहें प्रशासनिक पहल पर टिकी हैं।

