ओंटारियो। भारत की पहली वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने के बाद अनाहत सिंह ने कहा कि उन्हें अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे वह सपना देख रही हों। उन्होंने कहा कि यह खिताब उनके लिए बहुत मायने रखता है, क्योंकि जूनियर सर्किट में यह उनका आखिरी साल था।इससे पहले के टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंच चुकीं अनाहत ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने लगातार जीत हासिल की और 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद वर्ल्ड जूनियर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं। जीत के बाद अनाहत ने कहा, "मुझे अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपना देख रही हूं। पिछले चार वर्षों से मैं सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हारती रही हूं। जब भी किसी ने पूछा, तो मैंने हमेशा यही कहा कि 'यह टूर्नामेंट मेरे लिए किसी श्राप जैसा है और मैं इस इवेंट में कभी अच्छा नहीं खेल पाई।"
उन्होंने आगे कहा, "यह मेरा (जूनियर के तौर पर) आखिरी साल है और यह इसे जीतने का मेरा एकमात्र मौका था। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। इसी वजह से मुझे पता था कि अगर मैं तनाव में रही तो बहुत खराब खेलूंगी, इसलिए मैं बस कोर्ट पर उतरी और अपने शॉट्स सही तरीके से खेले। मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल में खेलने के हर पल का आनंद लेना चाहती थी।"
पिछले सीजन में सेमीफाइनल तक का सफर तय करके ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भारतीय खिलाड़ी ने फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया। स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी-जनरल साइरस पोंचा ने अनाहत की जीत को भारतीय स्क्वैश के लिए एक सपने के सच होने जैसा पल बताया।
पोंचा ने कहा, "यह भारतीय स्क्वैश के लिए एक ऐतिहासिक पल है। अनाहत में बड़ी ऊंचाइयां हासिल करने की क्षमता है।" पोंचा ने आगे कहा, "एसआरएफआई के संरक्षक और इंडियन स्क्वैश एकेडमी के दूरदर्शी (दिवंगत) एन. रामचंद्रन हमेशा कहते थे कि उनका सपना था कि भारत व्यक्तिगत इवेंट्स में वर्ल्ड चैंपियन तैयार करे। हमने डबल्स में यह हासिल किया था, लेकिन सिंगल्स में भी वैसी ही सफलता दोहराना वाकई एक सपने के सच होने जैसा है।"




