नई दिल्ली। आगामी 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में भारत की रक्षा क्षमता का एक नया अध्याय जुड़ेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की सामरिक जरूरतों के लिए तैयार की गई है और हिंद महासागर क्षेत्र में देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
1500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली 'हाइपरसोनिक ब्रह्मास्त्र'
यह हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल लगभग 1500 किलोमीटर की मारक क्षमता रखती है। डीआरडीओ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए. प्रसाद गौड़ ने बताया कि यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरती है, जिस कारण दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते। उच्च वायुगतिकीय दक्षता के साथ यह विभिन्न पेलोड ले जाने में सक्षम है और समुद्र में तैनात जहाजों पर लगे युद्धक हथियारों को नष्ट कर सकती है। डीआरडीओ हाइपरसोनिक लाइट मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रौद्योगिकियों पर भी काम कर रहा है। इस मिसाइल का प्रदर्शन भारत की आत्मनिर्भरता और उन्नत मिसाइल तकनीक में प्रगति को दर्शाएगा।
नौसेना की झांकी में युवा नौसैनिकों का जोश
इस वर्ष नौसेना की झांकी में स्वदेशी जहाजों और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत सहित पांचवीं शताब्दी के निर्मित जहाजों का चित्रण किया जाएगा। नौसेना के दल में 144 युवा नौसैनिक शामिल होंगे, जो कंधे से कंधा मिलाकर मार्च करेंगे। यह दल 'लघु भारत' का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा शामिल हैं। इनकी औसत आयु 25 वर्ष है और इन्हें परेड के लिए दो महीने से अधिक का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं का शौर्य प्रदर्शन हमेशा प्रेरणादायक होता है। इस बार हाइपरसोनिक मिसाइल का शामिल होना भारत की उभरती सैन्य ताकत और समुद्री क्षेत्र में बढ़ती क्षमता का प्रतीक होगा। पूरा देश 26 जनवरी को इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा।

