छतरपुर में हो गया 30,000 करोड़ का बड़ा घोटाला, समाजवादी पार्टी ने खोला मोर्चा...!

Advertisement
भोपाल/छतरपुर, जीतेन्द्र यादव। छतरपुर जिले के ग्राम पंचायत भैरा और मड़वा क्षेत्र में दशकों से चल रहे कथित अवैध ग्रेनाइट खनन के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) में दायर जनहित याचिका (क्रमांक 41873/2025) पर संज्ञान लिए जाने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा), मध्य प्रदेश ने इस पूरे प्रकरण को प्रदेश का सबसे बड़ा राजस्व घोटाला करार दिया है। पार्टी ने इस मामले में सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या है याचिका के गंभीर आरोप
यह जनहित याचिका भैरा सरपंच शिवराम दीक्षित और पत्रकार दिलीप सिंह भदौरिया द्वारा दायर की गई है। याचिका के अनुसार, वर्ष 1997 से विनोद खेड़िया और उनकी कंपनी किसान मिनरल्स प्रा. लि. द्वारा मड़वा और सिलपतपुरा क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है।
रॉयल्टी की चोरी: आरोप है कि 1997 के एग्रीमेंट में 200% लोकल डेवलपमेंट फीस (रॉयल्टी) का प्रावधान था, जिसे कंपनी ने कभी जमा नहीं किया।
भारी राजस्व हानि: याचिका में दावा किया गया है कि सरकार को अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का चूना लगाया गया है। 2005 के बाद रॉयल्टी दरें बढ़ने के बावजूद कंपनी को महज 800 रुपये प्रति घन मीटर की दर पर अनुचित लाभ दिया गया।
प्रशासनिक चुप्पी और मिलीभगत पर सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाया है कि वर्ष 2007-08 में रिकवरी नोटिस जारी होने के बावजूद अब तक वसूली क्यों नहीं हुई? पार्टी ने इसे स्पष्ट रूप से प्रशासनिक संरक्षण और भ्रष्टाचार का मामला बताया है। वर्ष 2021 की जांच में भी 5685 घन मीटर अवैध खनन की पुष्टि हुई थी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई।
मानवीय और पर्यावरणीय संकट
सपा ने आरोप लगाया कि खनन स्थल घनी आबादी, स्कूल और मंदिर से मात्र 500 मीटर के दायरे में है। विस्फोटकों के अनियंत्रित उपयोग से करीब 10,000 लोग प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत भैरा की 3,000 की आबादी इस प्रदूषण और खतरनाक धमाकों के बीच रहने को मजबूर है, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन रहा।
समाजवादी पार्टी की 5 सूत्रीय मांगें:
स्वतंत्र जांच: पूरे घोटाले की जांच CBI या न्यायिक निगरानी में कराई जाए।
FIR दर्ज हो: दोषी अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
पूरी वसूली: अवैध खनन से हुई हजारों करोड़ की राजस्व हानि की शत-प्रतिशत वसूली हो।
मुआवजा: प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा मिले और पर्यावरण पुनर्स्थापन (Restoration) का कार्य हो।
काम पर रोक: जांच पूरी होने तक संबंधित खदानों में सभी गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
सपा का अल्टीमेटम: "जनता के संसाधनों की लूट बर्दाश्त नहीं"
समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश (मीडिया प्रकोष्ठ) ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे। पार्टी ने प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है कि आखिर इतने वर्षों तक किसकी शह पर यह काला कारोबार चलता रहा? सपा ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।


