कूनो में 'अफ्रीकी मेहमानों' का भव्य स्वागत: बोत्सवाना से आए 9 नए चीते, अब भारत में चीतों का कुनबा बढ़कर हुआ 48!

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श्योपुर, उत्तम सिंह रावत। मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क के लिए शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 'प्रोजेक्ट चीता' के तीसरे चरण के तहत अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 9 नए चीते विशेष विमान के जरिए भारत पहुंचे। इन नए मेहमानों के आने से अब देश में चीतों का कुल कुनबा बढ़कर 48 हो गया है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भारत की एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि है।
ग्वालियर से कूनो तक का 'एयरलिफ्ट' ऑपरेशन
बोत्सवाना से उड़ान भरने के बाद भारतीय वायुसेना का विशेष विमान शुक्रवार रात करीब 9-10 बजे ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंड हुआ। यहां विशेषज्ञों की टीम ने चीतों का प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। शनिवार सुबह 8:30 बजे वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों के जरिए इन चीतों को ग्वालियर से कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना किया गया। पार्क में सुरक्षित लैंडिंग के लिए विशेष रूप से 5 हेलीपैड तैयार किए गए थे। सुबह 9:30 बजे तक सभी चीते कूनो पहुंच गए, जहां केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने उन्हें क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया।
कुनबे का गणित: 45 चीतों का घर बना कूनो
बोत्सवाना से लाए गए इस जत्थे में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। इन 9 चीतों के जुड़ने के बाद अकेले कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 45 हो गई है। खास बात यह है कि कूनो अब केवल विदेशी चीतों का घर नहीं रहा, बल्कि यहां 'मेक इन इंडिया' चीतों की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में कुल 48 चीतों में से 28 ऐसे हैं जिनका जन्म भारत की धरती पर ही हुआ है। इसके अलावा, 3 चीतों को कूनो से गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में शिफ्ट किया जा चुका है।
वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और क्वारंटाइन प्रक्रिया
नियमों के अनुसार, बोत्सवाना से आए इन सभी 9 चीतों को अभी एक महीने तक क्वारंटाइन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और भारतीय वातावरण के प्रति उनके अनुकूलन की लगातार निगरानी करेगी। एक महीने की अवधि पूरी होने और स्वास्थ्य मानकों पर खरा उतरने के बाद ही इन्हें मुख्य बाड़े में छोड़ा जाएगा।
प्रोजेक्ट चीता: नामीबिया से बोत्सवाना तक का सफर
भारत में चीतों को फिर से बसाने का यह महाअभियान (प्रोजेक्ट चीता) साल 2022 में शुरू हुआ था:
प्रथम चरण (2022): नामीबिया से 8 चीते लाए गए।
द्वितीय चरण (2023): दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए।
तृतीय चरण (2026): बोत्सवाना से 9 चीते पहुंचे।

कूनो की पारिस्थितिकी और वहां शिकार की प्रचुर उपलब्धता ने इस प्रोजेक्ट को सफल बनाया है। मादा चीता ज्वाला, आशा और गामिनी द्वारा शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि भारत की जलवायु इन राजसी जानवरों के अनुकूल है। बोत्सवाना सरकार के सहयोग से चलाया गया यह मिशन न केवल जैव-विविधता को समृद्ध करेगा, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाएगा।


