इंदौर,रविकांत वर्मा । अंबेडकर जयंती के अवसर पर इंदौर की केंद्रीय जेल से मंगलवार को छह आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को रिहा किया गया। यह रिहाई शासन द्वारा प्रदान की गई विशेष माफी के तहत उनके अच्छे आचरण को देखते हुए दी गई है। वर्षों तक जेल में सजा काटने के बाद आजादी मिलने पर सभी बंदी भावुक नजर आए और अपने परिजनों से मिलकर उनकी आंखें नम हो गईं।
जानकारी के अनुसार, रिहा किए गए कैदियों में भारत पिता जगन्नाथ, राधेश्याम पिता श्रीपत, इमरान पिता आशिक, फूलचंद पिता मांगीलाल भील, सुंदरलाल पिता राम सिंह और नर्सिंग पिता किशन शामिल हैं। ये सभी हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे और लंबे समय से केंद्रीय जेल में निरुद्ध थे। अच्छे व्यवहार और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के चलते इन्हें इस विशेष अवसर पर रिहाई का लाभ मिला।
जेल से बाहर निकलते ही परिजनों से मिलन का दृश्य बेहद भावुक रहा। कई बंदी वर्षों बाद अपने परिवार से मिल रहे थे, जिससे माहौल में खुशी और संवेदना दोनों झलक रही थी। परिजनों ने भी अपने प्रियजनों को गले लगाकर स्वागत किया और इस नई शुरुआत को सकारात्मक दिशा देने की उम्मीद जताई।
केंद्रीय जेल अधीक्षक डॉ. अलका सोनकर ने सभी रिहा बंदियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी। इस दौरान उन्हें श्रीफल, फूलमाला और पारिश्रमिक राशि भेंट की गई। अधीक्षक ने बंदियों को जीवन में नई शुरुआत करने, समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और भविष्य में किसी भी प्रकार के अपराध से दूर रहने की सलाह दी।
रिहा हुए सभी बंदियों ने भी समाज में सकारात्मक योगदान देने और कानून का पालन करते हुए ईमानदारी से जीवन यापन करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जेल में बिताए गए वर्षों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है और अब वे अपने परिवार और समाज के बीच एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं।
यह रिहाई न केवल बंदियों के लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण पहल भी मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि अच्छे आचरण और सुधार की दिशा में प्रयास करने वालों को समाज में पुनः स्थान दिया जा सकता है।


