म्यांमा में तख्तापलट के पांच साल , राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट जस का तस

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म्यांमार। म्यांमा में सेना द्वारा किए गए तख्तापलट को पांच साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन देश आज भी गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट से बाहर नहीं निकल पाया है। लोकतांत्रिक सरकार के तख्तापलट के बाद से हालात लगातार बिगड़ते चले गए हैं और आम नागरिकों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
राजनीतिक स्तर पर म्यांमा में अस्थिरता चरम पर है। सैन्य शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और सशस्त्र संघर्ष अब भी जारी हैं। लोकतंत्र समर्थक समूहों और जातीय सशस्त्र संगठनों के बीच टकराव ने देश को गृहयुद्ध जैसे हालात में धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद सैन्य शासन अपनी पकड़ बनाए हुए है।
आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। तख्तापलट के बाद विदेशी निवेश में भारी गिरावट आई है। मुद्रा का अवमूल्यन हुआ है और महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं, जिससे गरीबी और भुखमरी की समस्या गहराती जा रही है।
सामाजिक स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लाखों लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जबकि महिलाओं और बच्चों पर संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक म्यांमा में समावेशी राजनीतिक संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल नहीं होती, तब तक देश को इस गहरे संकट से उबरना मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय सहयोग के बिना हालात सुधरने की उम्मीद फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।
