दूषित पानी से बुजुर्ग की मौत, शव रखकर चक्काजाम

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इंदौर | भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से बुजुर्ग बद्री प्रसाद की मौत के बाद शनिवार को परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने भागीरथपुरा पुल के पास शव रखकर चक्काजाम कर दिया और स्थानीय भाजपा पार्षद कमल वाघेला के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
परिजनों का आरोप है कि बद्री प्रसाद की मौत को एक दिन बीत चुका है, लेकिन अब तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। परिवार का कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और अंतिम संस्कार के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। प्रशासन द्वारा कोई सहायता न मिलने से लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
परिवार ने बताया कि बद्री प्रसाद की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, इससे पहले वे पूरी तरह स्वस्थ थे। परिजनों का आरोप है कि यह मौत क्षेत्र में सप्लाई हो रहे दूषित पानी के कारण हुई है, लेकिन प्रशासन इसे मानने से इनकार कर रहा है। परिवार ने यह भी बताया कि दो माह पहले बद्री प्रसाद की बहू कंचन की भी इसी तरह मौत हो चुकी है, जिसे भी दूषित पानी से जोड़ा जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस के कई नेता, जिनमें नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे, पार्षद राजू भदौरिया सहित अन्य नेता मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार के समर्थन में धरने पर बैठ गए। सभी ने पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
करीब डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और इलाके में जाम की स्थिति बन गई।
एसडीएम के आश्वासन के बाद खुला जाम
स्थिति बिगड़ने की सूचना पर अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा। कुछ देर बाद एसडीएम निधि वर्मा, एसीपी विनोद दीक्षित सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और परिजनों से चर्चा की। एसडीएम ने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में जल्द ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराई जाएगी तथा बद्री प्रसाद और उनकी बहू की मौत के मामले में सीएमएचओ से रिपोर्ट लेकर शासन स्तर पर आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। इसके बाद परिजन शांत हुए और चक्का जाम समाप्त कर दिया गया।
अब तक 27 मौतें, 450 से अधिक मरीज
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 450 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं। फिलहाल 10 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें एक वेंटिलेटर पर और एक आईसीयू में है। क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अब डायरिया के मरीजों की संख्या भी कम हो गई है।
