अजयगढ़ (मोहम्मद मुस्तकीन)। पन्ना जिले के अजयगढ़ में एक ऐसी शादी हुई, जिसने आधुनिक फैशन और लग्जरी के इस दौर में पुरानी यादों को फिर से जिंदा कर दिया। फिल्म 'नदिया के पार' का वो सुरीला गीत "कोने दिशा में लेके चला रे बटुहिया" जैसे सबके होंठों पर आ गया, जब विश्वकर्मा परिवार की बारात बैलगाड़ियों के साथ निकली।
जहां आजकल बारातें मर्सिडीज, फॉर्च्यूनर और यहां तक कि हेलीकॉप्टर से निकलती हैं, वहीं यहां दूल्हा और पूरा बाराती दल अनगिनत सजी-धजी बैलगाड़ियों पर सवार होकर रवाना हुआ। अनोखी इस बारात में लग्जरी गाड़ियों की जगह बैलों की खिंची दर्जनों गाड़ियां थीं, जो धीरे-धीरे चलते हुए शहर की सड़कों से गुजरीं। जैसे ही यह बारात निकली, राहगीर और स्थानीय लोग इसे देखने के लिए सड़कों पर ठहर गए। हर कोई मोबाइल उठाकर इस दृश्य को कैद करने में जुट गया, मानो कोई पुरानी फिल्म का सीन जीवंत हो उठा हो।
दूल्हे के पिता ने इस अनोखी पहल पर कहा, "ये हमारी परंपरा और संस्कृति है। पहले के जमाने में बारातें इसी बैलगाड़ी से निकलती थीं, इसी से सफर करते थे। इसमें न डीजल-पेट्रोल की कोई समस्या है, न ही कोई फिजूलखर्ची। पर्यावरण के साथ-साथ सादगी का संदेश भी देता है।" यहां तक कि बारात में शामिल 20 साल से नाचते आए किन्नरों ने भी इस परंपरा की खूब सराहना की और कहा कि यह देखकर पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं।

