कॉन्वेंट स्कूल ने नहीं दिया दाखिला, पर इरादों ने दिलाई सफलता: निवाड़ी की सौम्या जैन ने UPSC में 346वीं रैंक हासिल की

Advertisement
बुंदेलखंड की बेटी का कमाल: भाषा की दीवार लांघकर सौम्या ने क्रैक किया UPSC, पिता का सिर गर्व से ऊंचा
भोपाल/निवाड़ी (आयुष शुक्ला)। अक्सर कहा जाता है कि अगर आपके सपनों में जान हो, तो भाषा या संसाधनों की कमी कभी आपके रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। बुंदेलखंड के छोटे से जिले निवाड़ी की रहने वाली सौम्या जैन ने इसे सच कर दिखाया है। देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC परीक्षा में 346वीं रैंक हासिल कर सौम्या ने न केवल अपने जिले का, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है।
जब स्कूल ने फेर लिया था मुंह...
सौम्या की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इसके पीछे एक बड़ा संघर्ष छिपा है। कक्षा 9वीं के बाद जब वे उच्च शिक्षा के लिए राजधानी भोपाल पहुंचीं, तो वहां के नामी इंग्लिश मीडियम स्कूलों ने उन्हें दाखिला देने से मना कर दिया था। वजह थी उनकी शुरुआती शिक्षा हिंदी मीडियम से होना। लेकिन सौम्या ने इस रिजेक्शन को निराशा में बदलने के बजाय अपनी ताकत बनाया। उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी और साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी खास भाषा की मोहताज नहीं होती।
परिवार में जश्न का माहौल
सौम्या के पिता एक कॉन्ट्रैक्टर हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी बेटी के सपनों को पंख दिए। सौम्या की इस उपलब्धि पर उनके भाई, बहन और पूरे परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है। जैसे ही रिजल्ट घोषित हुआ, बधाई देने वालों का तांता लग गया।
'पेपटेक टाइम' पर साझा किए सफलता के मंत्र
सौम्या ने 'पेपटेक टाइम' के साथ खास बातचीत में अपनी तैयारी के अनुभव साझा किए। उन्होंने उन युवाओं को खास टिप्स दिए जो वर्तमान में इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं:
* निरंतरता (Consistency): पढ़ाई में गैप न आने दें, रोज थोड़ा-थोड़ा लक्ष्य पूरा करें।
* भाषा को बाधा न बनाएं: माध्यम चाहे जो हो, आपकी समझ और उत्तर लिखने की शैली मायने रखती है।
* खुद पर भरोसा: जब दुनिया आप पर संदेह करे, तब भी खुद पर विश्वास रखें।
* सीमित संसाधन, सटीक रणनीति: बहुत सारी किताबों के बजाय, चुनिंदा किताबों को बार-बार पढ़ें।
"सफलता केवल बड़े स्कूलों या बड़े शहरों से नहीं आती, यह आपकी मेहनत और हार न मानने वाले जज्बे से आती है।" - सौम्या जैन
सौम्या जैन की कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो छोटे शहरों से आते हैं और भाषा की वजह से खुद को कमतर आंकते हैं। सौम्या ने साबित कर दिया कि बुंदेलखंड की मिट्टी में वो दम है जो बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है।


