नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में अकादमिक मुद्दों व पेपर लीक को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन के दौरान दर्ज की गई प्राथमिकियों (FIR) को रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि पेपर लीक व परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 3 महीने के भीतर मुआवजा प्रदान किया जाए।


सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को दिल्ली में प्रस्तावित अपना दोबारा प्रदर्शन मार्च वापस लेने का ऐलान किया। CJP के प्रवक्ता सौरव के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा उनकी मांगों को पूरा करने का ठोस आश्वासन मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि केंद्र सरकार छात्रों के प्रदर्शन के बाद CJP नेताओं से किए गए तीनों वादों और आश्वासनों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सॉलिसिटर जनरल ने संविधान के अनुच्छेद 142 का हवाला देते हुए छात्रों पर दर्ज 13 FIR को रद्द करने की मांग रखी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।


दिल्ली पुलिस की मांग और सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण

दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में NCRB के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया था कि प्रदर्शन स्थल पर 2,873 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग मौजूद थे। पुलिस हिंसा और संपत्ति के नुकसान की जांच के लिए इनके खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति चाहती थी। कोर्ट ने पहले ही (3 अगस्त के आदेश में) स्पष्ट किया था कि 'आपराधिक पृष्ठभूमि' का तात्पर्य केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में संलिप्त लोगों से है। सामान्य प्रदर्शनकारी छात्रों और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले युवाओं पर कोई केस नहीं चलाया जाएगा।


पूरे मामले की पृष्ठभूमि (NEET आंदोलन से जुड़ा घटनाक्रम)

20 जून को जंतर-मंतर से NEET-UG पेपर लीक के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ था। 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों के मार्च के दौरान सुरक्षाकर्मियों से तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा था। इसके बाद प्रदर्शन कई राज्यों में फैल गया। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया था, जो देशभर में हुए प्रदर्शनों और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच कर रही है। 25 जुलाई को सरकार की ओर से CJP की मुख्य मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था।