भारत-EU ट्रेड डील से अमेरिका नाराज, कहा- EU अपने खिलाफ जंग को कर रहा फाइनेंस

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नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अमेरिका ने नाराजगी जताई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत से रिफाइंड ऑयल प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं, जो रूसी तेल से बने होते हैं, और इस तरह EU रूस-यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फाइनेंस कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने रूस से ऊर्जा संबंध तोड़ने की भारी कीमत चुकाई है, जबकि यूरोप अब भी वैश्विक तेल व्यापार के लूपहोल का फायदा उठा रहा है।
दरअसल, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच आज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर समझौते का औपचारिक ऐलान हो सकता है। EU पहले ही इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बता चुका है। इस सिलसिले में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे।
अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए समझौते की दिशा में काम कर रहा है और यह जंग जल्द समाप्त हो सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और EU अपने बहुप्रतीक्षित FTA को अंतिम रूप देने वाले हैं।
इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का उद्देश्य भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार को आसान बनाना है। इससे व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, MSME सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, दोनों पक्षों के बाजार एक-दूसरे के लिए खुलेंगे और GI टैग वाले उत्पादों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता व्यापार के लिए टोल-फ्री रास्ते जैसा होगा।
EU दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है और भारत तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था। दोनों के साथ आने से करीब 200 करोड़ लोगों का साझा बाजार बनेगा और यह डील वैश्विक GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करेगी। पिछले साल भारत-EU के बीच व्यापार करीब 12.5 लाख करोड़ रुपए का रहा था, जो FTA के बाद दोगुना होने की उम्मीद जताई जा रही है।
