सावधान! इंदौर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दंपति ने गंवाए 1.15 करोड़ रुपये

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इंदौर,रविकांत वर्मा । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर 1 करोड़ 15 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी दी और करीब 15 दिनों तक दंपति को मानसिक दबाव में रखा। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरा मामला इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र का है। यहां बजरंग नगर निवासी 80 वर्षीय विजय सक्सेना और उनकी पत्नी 77 वर्षीय सुमन सक्सेना के मोबाइल पर 15 नवंबर 2025 को एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुणे एटीएस मुख्यालय का अधिकारी ‘चंद्रभान सिंह’ बताया। उसने दावा किया कि सुमन सक्सेना के नाम से जम्मू में एचडीएफसी बैंक खाते में 70 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है, जो कथित तौर पर आतंकवाद से जुड़ा है।
इसके बाद आरोपियों ने लगातार वीडियो कॉल कर दंपति को कथित पूछताछ के नाम पर रोज कभी एक घंटे तो कभी दो घंटे तक बैठाए रखा। उन्हें धमकाया गया कि सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी होगी, संपत्ति जब्त की जाएगी और बच्चों को नुकसान पहुंचाया जाएगा। डर के माहौल में ठगों ने व्हाट्सऐप के जरिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेज मंगवा लिए।
आरोपियों ने दो अलग-अलग बैंक खातों के नंबर देकर कहा कि जांच पूरी होने तक रकम “सुरक्षित ट्रांजैक्शन” के रूप में ट्रांसफर करनी होगी। 20 नवंबर 2025 को महिला ने अपने खाते से 49.70 लाख रुपये और उनके पति ने 65.30 लाख रुपये एनईएफटी के माध्यम से बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। साथ ही यह हिदायत भी दी गई कि बैंक में पूछताछ होने पर बताना कि रकम बेटियों के लिए भेजी जा रही है।
रकम ट्रांसफर के बाद लगातार फोन कॉल्स और मानसिक दबाव के चलते विजय सक्सेना की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कुछ दिन बाद सुमन सक्सेना ने पूरे मामले की जानकारी अपने दामाद को दी। इसके बाद साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई गई। जांच के उपरांत 27 फरवरी 2026 को हीरानगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।



