अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन का ऐलान, रमजान की शुरुआत के साथ मस्जिदों में बढ़ी रौनक

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छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा में मुस्लिम समाज के लिए खुशी और इबादत का मुकद्दस महीना रमजान शुरू हो गया है। अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन द्वारा जारी आधिकारिक ऐलान के अनुसार 18 फरवरी को रमजानुल मुबारक का चांद नजर आने की पुष्टि की गई, जिसके बाद 19 फरवरी से रमजान का पहला रोज़ा रखा गया।
संस्था के सदर अमसाल खान ने इसकी जानकारी देते हुए सभी रोज़ेदारों को रमजान की मुबारकबाद दी और इस पाक महीने में इबादत, संयम और सेवा का संदेश दिया। रमजान की शुरुआत के साथ ही शहर की मस्जिदों में विशेष नमाज़, तरावीह, कुरान पाक की तिलावत और दुआओं का सिलसिला शुरू हो गया है। रोज़ेदार सुबह सहरी कर पूरे दिन रोज़ा रखते हैं और शाम को मगरिब की अज़ान के साथ इफ्तार करते हैं। इस दौरान मुस्लिम समाज में आध्यात्मिक माहौल, अनुशासन, त्याग और सेवा भावना का विशेष महत्व होता है।
रमजान को इस्लाम धर्म में रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना माना जाता है। इस महीने में रोज़ा रखने के साथ ज़कात और सदका देने, गरीबों व जरूरतमंदों की मदद करने, आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने और बुराइयों से दूर रहने की सीख दी जाती है। पूरे महीने मस्जिदों में विशेष रौनक रहती है और लोग अल्लाह की इबादत में अधिक समय बिताते हैं। अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन द्वारा रोज़ेदारों की सुविधा के लिए पूरे रमजान माह का सहरी और इफ्तार समय (टाइम टेबल) भी जारी किया गया है, ताकि लोग निर्धारित समय पर रोज़ा रख सकें और इफ्तार कर सकें।
रमजान सहरी–इफ्तार टाइम टेबल (छिंदवाड़ा)
पहला अशरा — रहमत (1 से 10 रोज़ा)
19 फरवरी — सहरी 5:24 | इफ्तार 6:19
20 फरवरी — सहरी 5:24 | इफ्तार 6:19
21 फरवरी — सहरी 5:23 | इफ्तार 6:20
22 फरवरी — सहरी 5:23 | इफ्तार 6:20
23 फरवरी — सहरी 5:22 | इफ्तार 6:21
24 फरवरी — सहरी 5:22 | इफ्तार 6:21
25 फरवरी — सहरी 5:21 | इफ्तार 6:21
26 फरवरी — सहरी 5:21 | इफ्तार 6:21
27 फरवरी — सहरी 5:20 | इफ्तार 6:22
28 फरवरी — सहरी 5:20 | इफ्तार 6:22
दूसरा अशरा — मगफिरत (11 से 20 रोज़ा)
1 मार्च — सहरी 5:18 | इफ्तार 6:23
2 मार्च — सहरी 5:18 | इफ्तार 6:23
3 मार्च — सहरी 5:16 | इफ्तार 6:24
4 मार्च — सहरी 5:16 | इफ्तार 6:24
5 मार्च — सहरी 5:14 | इफ्तार 6:25
6 मार्च — सहरी 5:14 | इफ्तार 6:25
7 मार्च — सहरी 5:13 | इफ्तार 6:26
8 मार्च — सहरी 5:13 | इफ्तार 6:26
9 मार्च — सहरी 5:12 | इफ्तार 6:27
10 मार्च — सहरी 5:12 | इफ्तार 6:27
तीसरा अशरा — नजात (21 से 30 रोज़ा)
11 मार्च — सहरी 5:10 | इफ्तार 6:27
12 मार्च — सहरी 5:10 | इफ्तार 6:27
13 मार्च — सहरी 5:08 | इफ्तार 6:28
14 मार्च — सहरी 5:08 | इफ्तार 6:28
15 मार्च — सहरी 5:06 | इफ्तार 6:29
16 मार्च — सहरी 5:06 | इफ्तार 6:29
17 मार्च — सहरी 5:04 | इफ्तार 6:29
18 मार्च — सहरी 5:04 | इफ्तार 6:29
19 मार्च — सहरी 5:02 | इफ्तार 6:30
20 मार्च — सहरी 5:02 | इफ्तार 6:30
रमजान का महत्व
इस्लाम धर्म में रमजान को आत्मशुद्धि, धैर्य, त्याग और आध्यात्मिक उन्नति का महीना माना जाता है। रोज़ा व्यक्ति को अनुशासन, सहनशीलता और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देता है। इस दौरान समाज में आपसी सौहार्द, शांति और भाईचारे का वातावरण देखने को मिलता है। रमजान के दौरान मस्जिदों में विशेष रूप से तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है और महीने के अंतिम दिनों में शब-ए-कद्र की विशेष अहमियत होती है। ईद-उल-फितर के साथ इस पाक महीने का समापन होता है, जिसे मुस्लिम समाज हर्षोल्लास के साथ मनाता है।


