जम्मू। जम्मू-कश्मीर के जम्मू डिवीजन में खराब मौसम और मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए अधिकारियों ने शनिवार को अमरनाथ यात्रा रोकने का फैसला किया। किसी भी यात्री को यहां से घाटी की ओर जाने की इजाज़त नहीं दी गई।शुक्रवार तक 4.75 लाख से ज्यादा यात्रियों ने पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर लिए हैं, इसलिए अब जम्मू पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या भी कम हो गई है।

अधिकारियों ने बताया कि आज जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से यात्रियों के किसी नए जत्थे को घाटी की ओर जाने की इजाजत नहीं दी गई।

अधिकारियों ने कहा कि मौसम के हिसाब से हालात का जायजा लिया जाएगा और इस दौरान जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जाएगी, क्योंकि तीर्थयात्री यात्रा के बेस कैंप तक पहुंचने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं।

यह यात्रा 3 जुलाई को हुई थी और यह 57 दिनों के बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहारों के साथ संपन्न होगी।

फिलहाल दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप रूट से यात्रा करने की इजाजत किसी भी यात्री को नहीं है, क्योंकि वहां ट्रैक की मरम्मत का काम चल रहा है।

यात्री उत्तर कश्मीर के गांदरबल जिले में बालटाल बेस कैंप से यात्रा कर रहे हैं।

इससे पहले, अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के सात साल बाद सुरक्षा कारणों से एक दिन के लिए रोकी गई अमरनाथ यात्रा गुरुवार को फिर से शुरू हुई थी।

1,801 तीर्थयात्रियों का एक नया समूह (जिसे अधिकारियों ने 28वां जत्था बताया) कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 2.45 बजे जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कश्मीर में बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।

इस जत्थे में 1,347 पुरुष, 351 महिलाएं, 89 साधु और 14 साध्वियां शामिल थीं, जो 74 गाड़ियों में यात्रा कर रहे थे।

इस साल 3 जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से 4.71 लाख से ज्यादा यात्रियों ने पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन किए हैं।