नई दिल्ली। केंद्र सरकार की प्रमुख डिजिटल पहल डिजिलॉकर और उमंग (यूएमएएनजी) प्लेटफॉर्म का दायरा लगातार बढ़ रहा है। संसद में बुधवार को दी गई जानकारी के अनुसार, डिजिलॉकर पर अब 72.43 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जबकि पिछले तीन वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर 72.86 करोड़ दस्तावेज एक्सेस लेनदेन (डॉक्यूमेंट एक्सेस ट्रांजैक्शन्स) दर्ज किए गए हैं।राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उमंग प्लेटफॉर्म पर भी उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर 11.66 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर्स हैं और पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 798 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिकों को तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाने और डिजिटल सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के विजन के अनुरूप जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसके तहत सरकार ने डिजिटल पहुंच बढ़ाने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक देश भर में 2,575 सरकारी सेवाएं उमंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इनमें 880 सेवाएं केंद्र सरकार और 1,695 सेवाएं राज्य सरकारों से संबंधित हैं। वहीं डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर 5,437 प्रकार के दस्तावेज और सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 661 केंद्र सरकार तथा 4,776 राज्य सरकारों से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया है। ये केंद्र नागरिकों को सरकारी सेवाओं के अलावा बैंकिंग, वित्तीय, बीमा, पेंशन और बिल भुगतान जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं।

मंत्री के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश की ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 कॉमन सर्विस सेंटर संचालित हो रहे थे। इनमें से 70,069 सीएससी महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जो महिला सशक्तिकरण और डिजिटल समावेशन का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

उन्होंने बताया कि उमंग और डिजिलॉकर दोनों प्लेटफॉर्म मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक कभी भी और कहीं से भी सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को आधार, ई-साइन, एपीआई सेतु और अन्य प्रमुख डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा गया है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षित प्रमाणीकरण, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन और सहमति-आधारित साझाकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने और कागजी प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता कम हुई है।