भोपाल | राजधानी भोपाल में एक बड़ा निवेश घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। कम समय में पैसा दोगुना करने, हर महीने मोटा ब्याज देने और रोजगार का सपना दिखाकर हजारों परिवारों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाली 'वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड' पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है। मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा समेत कुल 14 पदाधिकारियों और संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
एजेंटों के जरिए घर-घर फैलाया ठगी का जाल
जांच में सामने आया है कि इस संस्था ने भोपाल और आसपास के इलाकों में करीब 3,000 मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को निशाना बनाया। गांवों और कस्बों में बकायदा एजेंट भेजे गए, जिन्होंने घर-घर जाकर लोगों को लुभावनी फिक्स डिपॉजिट (FD) स्कीम्स की जानकारी दी। आम जनता का भरोसा जीतने के लिए बाकायदा बैठकें आयोजित की जाती थीं और निवेश के बदले संस्था की ओर से 'जन सहयोग कैश क्रेडिट सर्टिफिकेट' जारी किए जाते थे। इन दस्तावेजों में जमा राशि, मैच्योरिटी की तारीख और मिलने वाला रिफंड साफ लिखा होता था, जिसके कारण लोग आसानी से झांसे में आ गए।
12 फीसदी ब्याज और रकम दोगुनी करने का झांसा
सोसायटी के कारनामों को लेकर निवेशकों ने बताया कि उन्हें बैंक फिक्स डिपॉजिट से कहीं ज्यादा, यानी 12 प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज देने का लालच दिया गया था। कई निवेशकों को यह भी सपना दिखाया गया कि कुछ ही सालों में उनकी मूल रकम दोगुनी हो जाएगी। लोगों ने बच्चों की पढ़ाई, शादी और बुढ़ापे के लिए जोड़कर रखी रकम इस उम्मीद में सौंप दी कि उनका भविष्य सुरक्षित होगा, लेकिन मैच्योरिटी अवधि पूरी होने के बाद संस्था ने भुगतान करने से साफ मना कर दिया।
बैंक ऑफ बड़ौदा के खातों से खुली पोल
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश 'भ्रष्टाचार निवारण युवा मंच' के संयोजक अशोक कुमार टाटा की शिकायत के बाद हुआ। मामले को संज्ञान में लेते हुए EOW ने जब तकनीकी और दस्तावेजी जांच शुरू की, तो परतें खुलती चली गईं।
खंगाले गए बैंक खाते: जांच टीम ने बैंक ऑफ बड़ौदा की हबीबगंज शाखा में मौजूद संस्था के खातों के रिकॉर्ड और स्टेटमेंट जब्त किए।
करोड़ों का हेरफेर: बैंक दस्तावेजों से प्रमाणित हुआ कि संस्था के खातों में सीधे तौर पर साधारण निवेशकों के ₹1 करोड़ 64 लाख जमा कराए गए थे, जिसके बाद इस रकम की हेराफेरी कर दी गई।
संस्था के अध्यक्ष और पदाधिकारियों पर मुकदमा दर्ज
EOW ने बैंक रिकॉर्ड, फर्जी सर्टिफिकेट और पीड़ित निवेशकों के बयानों को आधार बनाकर 14 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है।
मुख्य आरोपियों की सूची:
एफआईआर में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष बीएस चौहान, अभिषेक शर्मा, संचालक इंद्रेश सिंह, धीरज पवार, जितेंद्र सिंह, राकेश मालवीय, विकास गजभिए, चिरौंजी लाल मीणा, श्वेता शर्मा और संध्या सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं और यह जांच का दायरा बढ़ने पर ठगी की कुल राशि और पीड़ितों की संख्या में और इजाफा होने की पूरी संभावना है।

