उत्तर प्रदेश। बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षों से प्रतीक्षित दोहरी रेल लाइन का सपना अब धरातल पर उतरता दिख रहा है। उत्तर मध्य रेलवे द्वारा क्रियान्वित की जा रही ₹4,329 करोड़ लागत वाली 'झांसी-मानिकपुर एवं खैरार-भीमसेन रेल दोहरीकरण परियोजना' के कई हिस्सों पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। 431 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न सिर्फ ट्रेनों की लेटलतीफी दूर होगी, बल्कि झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और कानपुर सहित छह जिलों के सामाजिक व आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
177 किलोमीटर से अधिक ट्रैक चालू; मऊरानीपुर-रोरा सेक्शन पर भी दौड़ीं ट्रेनें
वर्ष 2018 में स्वीकृत इस परियोजना को कुल 26 निर्माण खंडों में विभाजित किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब तक कुल 177.503 किलोमीटर लंबा दोहरीकृत रेल ट्रैक पूरी तरह तैयार होकर चालू हो चुका है। लगभग 122.628 किलोमीटर हिस्से पर दोहरी लाइन बिछाई जा चुकी है। हाल ही में मऊरानीपुर से रोरा के बीच 9.58 किलोमीटर लंबे नए दोहरीकृत सेक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है। इस रूट पर अब तक 58.823 किलोमीटर ट्रैक चालू किया जा चुका है। ट्रेनों के इंजन और दिशा बदले बिना सुगम संचालन के लिए महोबा (3.06 किमी) और खैरार (16.86 किमी) में बन रही दोनों कार्ड लाइनों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।
कानपुर-झांसी रूट के लिए बनेगा मजबूत वैकल्पिक कॉरिडोर
वर्तमान में कानपुर-उरई-झांसी रेल मार्ग अत्यधिक व्यस्त (सैचुरेटेड) कॉरिडोर है, जहां लखनऊ, वाराणसी और बिहार से मुंबई, भोपाल व दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों का भारी दबाव रहता है। किसी तकनीकी खराबी या रखरखाव के समय इस रूट पर गाड़ियां प्रभावित होती हैं। खैरार-भीमसेन-बांदा-महोबा-झांसी मार्ग का दोहरीकरण पूरा होने से रेलवे को एक मजबूत वैकल्पिक बायपास मार्ग मिल जाएगा, जिससे आपात स्थिति में ट्रेनों का रूट डायवर्जन आसान होगा और मुख्य लाइन पर दबाव कम किया जा सकेगा।
व्यापार, कृषि और यात्रियों को होंगे ये बड़े फायदे
वर्तमान में सिंगल लाइन होने के कारण क्रासिंग के लिए ट्रेनों को स्टेशनों व आउटर पर खड़ा रहना पड़ता है। दोहरी लाइन बनने से अप और डाउन गाड़ियां बिना रुकावट के चलेंगी, जिससे लेटलतीफी खत्म होगी।बुंदेलखंड से पत्थर, गिट्टी, दलहन, तिलहन और कृषि उत्पादों का परिवहन देश भर में होता है। दोहरी लाइन से मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी और स्थानीय कृषि व खनिज व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। लाइन की क्षमता (लाइन कैपेसिटी) बढ़ने से भविष्य में प्रयागराज, चित्रकूट और मध्य भारत की ओर जाने वाली कई नई यात्री ट्रेनें शुरू की जा सकेंगी।
बाढ़ के कारण थमी थी निर्माण की रफ्तार; अब दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार, बेतवा, केन और यमुना जैसी प्रमुख नदियों पर रेलवे पुलों के निर्माण के दौरान मानसून और बाढ़ के कारण कार्य की गति प्रभावित हुई थी। हालांकि, अब निर्माण कार्यों में तेजी लाई गई है और पूरी 431 किलोमीटर लंबी परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का संशोधित लक्ष्य रखा गया है।












