मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव बोर्ड (एसबीडब्ल्यूएल) ने सोमवार को अपनी 26वीं आधिकारिक बैठक में कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रस्तावों को मंजूरी दी। यह महाराष्ट्र में वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।बोर्ड द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों में, दो महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों को वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा दिया गया और सात जिलों में फैले 14 नए संरक्षण अभयारण्यों के प्रस्तावों को औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई।
गडचिरोली जिले में स्थित 'कोलामार्का संरक्षण रिजर्व' को अब 'वन्यजीव अभयारण्य' का दर्जा दिया गया है। यह क्षेत्र लुप्तप्राय एशियाई जंगली भैंसों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास माना जाता है।
कोलामार्का को आधिकारिक तौर पर वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा, मौजूदा तांसा वन्यजीव अभयारण्य के विस्तार के लिए छह गांवों (ओग्दा, खोड्डे, तिरमल, पचघर, फांसद और आमले) की 588.767 हेक्टेयर निजी और राजस्व भूमि को शामिल करने की मंजूरी दी गई है, ताकि अभयारण्य को मानव बस्ती मुक्त बनाया जा सके।
पुणे, रायगढ़, नासिक, नंदुरबार, ठाणे, पालघर और चंद्रपुर जिलों में फैले 14 नए 'संरक्षण रिजर्व' के प्रस्तावों को बोर्ड की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इन रिजर्व में वेल्हे-मुल्शी (पुणे/रायगढ़), भोरगिरीगढ़ (पुणे), लोनावला (पुणे/रायगढ़), डिंडोरी (नासिक), सुरगाणा (नासिक), तहरबाद (नासिक), चिंचपाड़ा (नंदुरबार), अलीबाग (रायगढ़), घेरा माणिकगढ़ (रायगढ़), गुमतारा (ठाणे), जव्हार (पालघर), अशेरीगढ़ (पालघर), धामनी (पालघर) और एकारा (चंद्रपुर) शामिल हैं।
इसके अलावा, राज्य वन्यजीव बोर्ड ने कोका वन्यजीव अभयारण्य के 100.139 वर्ग किमी क्षेत्र और जायकवाड़ी पक्षी अभयारण्य के 255.79 वर्ग किमी क्षेत्र को 'क्रिटिकल वाइल्डलाइफ हैबिटेट' (महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास) घोषित किया है। यह भी निर्णय लिया गया कि वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर रखरखाव, गाद हटाने और बांध मरम्मत कार्यों को संबंधित प्रबंधन योजनाओं में तीन महीने के भीतर स्थायी रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
प्रत्येक परियोजना के लिए नए प्रशासनिक अनुमोदन प्राप्त करने के बजाय वन्यजीव अधिकारियों को पहले से सूचित किया जाना चाहिए।
संरक्षित क्षेत्रों, पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों और बाघ गलियारों में आवश्यक नागरिक और अवसंरचना परियोजनाओं (सिंचाई, पेयजल, सड़कें, पुल, विद्युत पारेषण, चिकित्सा इकाइयां और भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल) के लिए मंजूरी दे दी गई। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्राकृतिक आपदा घोषित करने, बाघ अभयारण्यों में शांत क्षेत्र (कोर/बफर/ईएसजेड) स्थापित करने और बफर क्षेत्रों में स्थित गांवों के लिए पुनर्वास नीतियां तैयार करने पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक महीने के भीतर कर्मचारियों की आवश्यकताओं, प्रतिनियुक्तियों और रिक्त पदों का मूल्यांकन करें ताकि अधिसूचित रिजर्व को क्षेत्रीय वन/वन विकास निगम, महाराष्ट्र के नियंत्रण से समर्पित वन्यजीव विंग को हस्तांतरित किया जा सके।
















