नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को व्हाइट हाउस ने 'सकारात्मक' करार दिया है। वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते को लेकर ज्यादातर मुद्दों पर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब उसके अंतिम प्रारूप को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता मैथ्यू मिडलटन ने आईएएनएस के पूछे सवालों का जवाब देते हुए कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भारत के अधिकारियों के साथ सकारात्मक बातचीत कर रहा है, ताकि ऐसा ऐतिहासिक व्यापार समझौता सुनिश्चित किया जा सके जो अमेरिका और अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दे।"
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीबी व्यक्तिगत संबंध हैं और दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
यह बयान ऐसे समय आया है, जब गोयल ने नीदरलैंड के हेग में आयोजित भारत-नीदरलैंड बिजनेस फोरम में कहा, "भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है।"
गोयल जर्मनी और नीदरलैंड की यात्रा पर गए भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पिछले साढ़े चार वर्षों में नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं।
भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की थी। सात फरवरी की घोषणा के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही थी। इसके बाद अमेरिकी टैरिफ नीति में हुए बदलावों, जिनमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद की परिस्थितियां भी शामिल हैं, ने बातचीत के नए दौर की जरूरत पैदा की।
दोनों देशों के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए हाल के महीनों में कई उच्चस्तरीय संपर्क हुए हैं। गोयल ने एक अक्टूबर को मिलवॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात की थी। इसके बाद वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों के एक दल ने 15 से 17 अक्टूबर तक वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत की।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी 20 अक्टूबर को मुंबई यात्रा के दौरान संकेत दिया था कि दोनों देश समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, " समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कुछ ही मुद्दे बाकी हैं और उन्हें जल्द सुलझाए जाने की उम्मीद है।"
रूबियो ने यह भी स्पष्ट किया था कि अमेरिकी विदेश विभाग व्यापार समझौतों पर सीधे बातचीत नहीं करता, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में उसकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर दोनों देशों के कारोबारी जगत की नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत उससे ऊर्जा उत्पादों और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में खरीद बढ़ाए। वहीं, भारतीय निर्यातक अमेरिकी टैरिफ में राहत की उम्मीद करते हैं।
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के कलपुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद तथा कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
















