भोपाल, अनुभव मिश्रा। मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने भले ही तैयारियां पूरी होने का दावा किया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर देरी, बारदाने की कमी और किसानों की चिंता जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं। इस बार खरीदी प्रक्रिया को दो चरणों में लागू किया गया है, जिससे व्यवस्था को सुचारू रखने की कोशिश की जा रही है।


1. खरीदी की नई तारीखें और दो चरणों में व्यवस्था
इस साल गेहूं उपार्जन की शुरुआत पहले की तुलना में देरी से हो रही है। जहां हर साल खरीदी 20-25 मार्च के बीच शुरू हो जाती थी, वहीं इस बार पहला चरण 10 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस चरण में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग शामिल हैं। दूसरे चरण में प्रदेश के शेष संभागों—ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस दो-चरणीय व्यवस्था से भीड़ और अव्यवस्था से बचा जा सकेगा।


2. 15-20 दिन की देरी से बढ़ी किसानों की चिंता
खरीदी में 15 से 20 दिन की देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन किसानों ने अपनी फसल तैयार कर ली है, वे अब उपार्जन केंद्रों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन चुकाने का दबाव भी किसानों पर बना हुआ है। ऐसे में कई किसानों के सामने मंडियों में कम दाम पर गेहूं बेचने की मजबूरी खड़ी हो गई है, जिससे उन्हें एमएसपी का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।


3. MSP और बोनस के साथ बेहतर दाम का दावा
सरकार ने इस बार किसानों को बेहतर कीमत देने का दावा किया है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसके साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। यानी कुल मिलाकर किसानों को 2625 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल सकता है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और निजी व्यापारियों पर निर्भरता कम होगी।


4. रिकॉर्ड पंजीयन, बढ़ा भरोसा
इस बार गेहूं खरीदी के लिए रिकॉर्ड संख्या में किसानों ने पंजीयन कराया है। करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल से लगभग 3.6 लाख ज्यादा है। पंजीकृत रकबा भी बढ़कर 41.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसे सरकार किसानों के बढ़ते भरोसे का संकेत मान रही है।


5. उपार्जन केंद्रों और व्यवस्थाओं की तैयारी
राज्य में किसानों की संख्या के हिसाब से सैकड़ों उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। कुछ जिलों में 142 तक केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां गेहूं की खरीदी की जाएगी। सरकार का दावा है कि इन केंद्रों पर छांव, पानी, बारदाना और तुलाई की बेहतर व्यवस्था की जाएगी ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


6. स्लॉट बुकिंग सिस्टम से मिलेगी राहत
इस बार खरीदी प्रक्रिया को और व्यवस्थित बनाने के लिए स्लॉट बुकिंग सिस्टम लागू किया गया है। किसान अपनी सुविधानुसार तारीख और समय चुनकर उपार्जन केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे। इससे केंद्रों पर भीड़ कम होगी और किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, राजस्व विभाग द्वारा रकबे का सत्यापन भी तेजी से किया जा रहा है।


7. 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य
सरकार ने इस बार 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 77 लाख मीट्रिक टन से थोड़ा अधिक है। हालांकि, 2020 में कोरोना काल के दौरान बने 129 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार नया रिकॉर्ड बनना मुश्किल नजर आ रहा है।


8. भंडारण और बारदाने की व्यवस्था
भंडारण को लेकर सरकार ने पर्याप्त तैयारी का दावा किया है। प्रदेश में करीब 400 लाख मीट्रिक टन की कवर्ड स्टोरेज क्षमता है, जिसमें से 103 लाख मीट्रिक टन खाली है। इसके अलावा, केंद्र सरकार से 50 हजार जूट गठानों का अतिरिक्त आवंटन भी मिला है। HDP/PP बैग और एक बार इस्तेमाल होने वाले जूट बारदाने की अनुमति भी दी गई है।


9. ईंधन और सप्लाई चेन पर नजर
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन सरकार ने दावा किया है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इससे उपार्जन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।


10. कांग्रेस का हमला और सियासी घमासान
गेहूं खरीदी को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि मंडियों में बारदाने की कमी है और सरकार जानबूझकर खरीदी में देरी कर रही है। उन्होंने इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी बताते हुए विरोध प्रदर्शन और उपवास की चेतावनी भी दी है।


11. किसानों के सामने असली चुनौती
सरकार के दावों के बावजूद किसानों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं। समय पर टोकन मिलना, खरीदी में पारदर्शिता, समय पर भुगतान और केंद्रों पर सुविधाएं—ये सभी मुद्दे जमीन पर परीक्षा की कसौटी बनेंगे। यदि इनमें किसी भी स्तर पर कमी रही, तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


12. क्या इस बार मिलेगी राहत या बढ़ेगी परेशानी?
कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी की है और कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। लेकिन देरी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और किसानों की आर्थिक मजबूरी इस पूरे सिस्टम पर सवाल भी खड़े कर रही है। अब यह देखना होगा कि ये तैयारियां जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती हैं और क्या किसानों को वास्तव में राहत मिल पाती है या नहीं।